लोकसभा सीट बढ़ाने का बिल क्यों गिरा: पीएम मोदी की अपील बेअसर, जानिए वजह

लोकसभा (Lok Sabha) में सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक को सरकार पारित नहीं करा सकी, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और संसदीय बहस तेज हो गई है। मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सोशल मीडिया एक्स (X) पर अपील करते हुए सभी दलों से महिला आरक्षण के पक्ष में वोट देने का आग्रह किया था, लेकिन इसके बावजूद सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।

पीएम की अपील के बाद भी नहीं बना गणित:
17 अप्रैल को दोपहर के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक्स (X) पर पोस्ट कर सांसदों से महिला आरक्षण के समर्थन में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को उसका अधिकार मिलना चाहिए। इसके बावजूद लोकसभा (Lok Sabha) में जब मतदान हुआ, तो आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक गिर गया।

दो-तिहाई बहुमत से रह गई सरकार दूर:
मतदान के दौरान लोकसभा (Lok Sabha) में कुल 528 सांसद मौजूद थे। इस हिसाब से बिल पास कराने के लिए 352 वोट जरूरी थे, लेकिन सरकार के पक्ष में 298 वोट ही पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। इस प्रकार बिल 54 वोट से पीछे रह गया और पारित नहीं हो सका।

महिला आरक्षण से जुड़ा था पूरा मामला:
सरकार इस विधेयक के माध्यम से लोकसभा (Lok Sabha) की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करना चाहती थी। इसके साथ ही परिसीमन प्रक्रिया लागू कर महिला आरक्षण कानून को प्रभावी बनाना भी उद्देश्य था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी हैं, लेकिन यह व्यवस्था अब नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू हो सकेगी।

तीन विधेयकों की थी योजना:
सरकार ने इस दिशा में तीन विधेयक प्रस्तुत किए थे—संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026। इनमें से संविधान संशोधन विधेयक के लिए विशेष बहुमत आवश्यक था, जबकि अन्य दो विधेयकों के लिए सामान्य बहुमत पर्याप्त था।

विपक्ष का रुख और आपत्ति:
कांग्रेस (Congress) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि महिला आरक्षण के पक्ष में होने के बावजूद जिस तरीके से यह विधेयक लाया गया, वह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और परिसीमन विधेयक का विरोध करेगा।

सरकार ने क्यों पेश किया बिल:
सवाल उठ रहा है कि जब सरकार के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी, तब भी यह विधेयक क्यों लाया गया। इस पर माना जा रहा है कि सरकार महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से पहले लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहती थी। इसके लिए सीटों का पुनर्गठन और परिसीमन जरूरी था।

अन्य विधेयकों पर नहीं हुई वोटिंग:
सरकार ने परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर मतदान नहीं कराया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kirren Rijiju) ने कहा कि ये विधेयक आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर अलग से वोटिंग की आवश्यकता नहीं है।

राजनीतिक समीकरण बने निर्णायक:
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास 293 सांसद थे, जो कुल संख्या का करीब 54 प्रतिशत है। विपक्षी गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या होने के कारण सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही। इससे यह स्पष्ट हो गया था कि बिल पारित होना कठिन होगा।

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