पहलवानों के अखाड़े के लिए पुश्तैनी जमीन गिरवी रखने वाले सुबेदार यादव ने PM मोदी से मुलाकात की लगाई गुहार

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो खेल और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रयासों की जमीनी हकीकत को दर्शाती है। सेवापुरी ब्लॉक (Sevapuri Block) के ग्राम सभा अदमापुर महनाग (Admapur Mahanag) निवासी सुबेदार यादव ने पहलवान खिलाड़ियों के लिए अखाड़ा बनाने हेतु अपनी पुश्तैनी जमीन तक दांव पर लगा दी, लेकिन लंबे समय बाद भी उन्हें अपेक्षित सम्मान और सहायता नहीं मिली है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय वाराणसी (PMO Varanasi) को पत्र सौंपकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मिलने की अनुमति मांगी है।

Handwritten letter addressed to the Prime Minister of India, discussing various topics and concerns related to public welfare and governance.

गांव के खिलाड़ियों के लिए उठाया बड़ा कदम:
सुबेदार यादव ने वर्ष 2013 में गांव के पहलवानों को अभ्यास के दौरान आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए अखाड़ा निर्माण का निर्णय लिया। उस समय मिट्टी और बारिश के कारण खिलाड़ियों को अभ्यास में काफी परेशानी होती थी। ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की इस समस्या को देखते हुए उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर बड़ा कदम उठाया।

पुश्तैनी जमीन गिरवी रखकर किया निर्माण:
अखाड़ा निर्माण के लिए सुबेदार यादव ने अपनी ढाई बीघा पुश्तैनी जमीन गिरवी रख दी। इसके अलावा उन्होंने रिश्तेदारों और अन्य माध्यमों से लगभग 9 लाख रुपये का कर्ज लेकर अखाड़े का निर्माण पूरा कराया। यह पूरा प्रयास पूरी तरह व्यक्तिगत था, जिसका उद्देश्य केवल गांव के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देना था।

ग्राम सभा को मिला सम्मान, लेकिन योगदानकर्ता उपेक्षित:
सुबेदार यादव के इस प्रयास का परिणाम यह रहा कि वर्ष 2016 में ग्राम सभा अदमापुर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। इसके बाद 2018 में ग्राम सभा अदमापुर महनाग को भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान से सम्मानित किया गया। हालांकि, इस पूरे विकास कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद सुबेदार यादव को न तो कोई व्यक्तिगत सम्मान मिला और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

भेदभाव और उपेक्षा का आरोप:
सुबेदार यादव का कहना है कि उन्होंने गांव और खिलाड़ियों के हित में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ उपेक्षा और भेदभाव हुआ। उनका आरोप है कि जिस व्यक्ति ने जमीन और आर्थिक संसाधन लगाकर इस कार्य की नींव रखी, उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

प्रधानमंत्री से मिलने की मांग:
अब सुबेदार यादव ने इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मिलने की इच्छा जताई है। आगामी 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री के वाराणसी (Varanasi) दौरे को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय वाराणसी (PMO Varanasi) को पत्र लिखकर प्रोटोकॉल के तहत मुलाकात की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि वे एक जागरूक नागरिक और मतदाता के रूप में अपनी बात सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं।

लोकतांत्रिक अधिकार का हवाला:
सुबेदार यादव ने अपनी अपील में कहा है कि यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है कि वे अपने जनप्रतिनिधि और सांसद को अपनी समस्या और व्यथा से अवगत कराएं। उन्होंने न्याय और सम्मान की मांग को लेकर यह कदम उठाया है।


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रिपोर्टर: जफ़र इकबाल

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