अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump (डोनाल्ड ट्रम्प) के करीबी सहयोगी और वरिष्ठ सीनेटर Lindsey Graham (लिंडसे ग्राहम) के निधन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटने के कुछ घंटे बाद उनकी तबीयत बिगड़ने और फिर मौत होने के कारण इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह के दावे और अटकलें सामने आ रही हैं। एक ओर उनके कार्यालय ने बीमारी को मौत की वजह बताया है, वहीं कुछ मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषकों ने संभावित साजिश की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मौत की वजह को लेकर क्या जानकारी सामने आई?:
71 वर्षीय Lindsey Graham (लिंडसे ग्राहम) 10 जुलाई को Ukraine (यूक्रेन) दौरे पर गए थे और 11 जुलाई को America (अमेरिका) लौटे। बताया गया कि यात्रा से पहले वह पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे रहे थे, लेकिन 12 जुलाई की रात उनका निधन हो गया। उनके कार्यालय ने कहा कि मौत बीमारी के कारण हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मृत्यु दिल की धमनी फटने से हुई। हालांकि, टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है, इसलिए अंतिम डेथ सर्टिफिकेट जारी होना बाकी है। इसी कारण यह चर्चा भी जारी है कि मौत पूरी तरह प्राकृतिक थी या किसी अन्य कारण की जांच की आवश्यकता है।
साजिश की आशंका क्यों जताई जा रही है?:
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि निधन से कुछ घंटे पहले उनकी ग्राहम से फोन पर बातचीत हुई थी। उनके अनुसार ग्राहम की आवाज सामान्य थी, हालांकि वह कुछ थके हुए लग रहे थे। इसी बीच कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में रूस या ईरान से जुड़े संभावित एंगल पर चर्चा की गई। दक्षिणपंथी पत्रकार Laura Loomer (लौरा लूमर) ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ग्राहम को पहले धमकियां मिली थीं। वहीं कुछ विश्लेषकों ने कहा कि इन परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि किसी जांच एजेंसी ने नहीं की है।
रूस का नाम क्यों लिया जा रहा है?:
लिंडसे ग्राहम को रूस और ईरान का मुखर आलोचक माना जाता था। Russia (रूस) और Ukraine (यूक्रेन) युद्ध के दौरान उन्होंने कई बार रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की वकालत की। Kyiv (कीव) में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार कर लिया है।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यूक्रेन यात्रा के दौरान उनकी आवाजाही के समय किसी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि पूर्व CIA (सीआईए) अधिकारी Michael Sellers (माइकल सेलर्स) का कहना है कि हत्या के कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं हैं, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।
रूस के खिलाफ ग्राहम का रुख रहा सख्त:
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वर्ष 2022 में ग्राहम ने सार्वजनिक रूप से रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin (व्लादिमीर पुतिन) के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की थीं। वर्ष 2023 में यूक्रेन यात्रा के दौरान दिए गए उनके बयान के बाद रूस ने उन्हें अपनी वांटेड सूची में शामिल कर लिया था। वर्ष 2025 में उन्होंने अमेरिकी सीनेट में ऐसा विधेयक भी पेश किया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था।
भारत को लेकर भी दिए थे कई बयान:
लिंडसे ग्राहम ने अलग-अलग समय पर भारत को लेकर भी कई बयान दिए थे। वर्ष 2009 में उन्होंने The New York Times (द न्यूयॉर्क टाइम्स) में प्रकाशित एक लेख में भारत और चीन जैसे देशों पर बॉर्डर टैक्स लगाने की बात कही थी। वर्ष 2019 में Article 370 (अनुच्छेद 370) हटाए जाने के बाद उन्होंने कुछ अन्य सांसदों के साथ राष्ट्रपति ट्रम्प को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की थी।
जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि यदि भारत, चीन और ब्राजील रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर कड़े टैरिफ लगाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत को रूस और अमेरिका में से किसी एक को चुनना होगा। बाद में उन्होंने दावा किया कि टैरिफ के दबाव के कारण भारत ने रूस से तेल खरीद में कमी की है।
ईरान में क्यों हुई अलग-अलग प्रतिक्रियाएं?:
लिंडसे ग्राहम के निधन के बाद Iran (ईरान) के कुछ मीडिया संस्थानों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। कुछ रिपोर्टों में उन्हें ईरान का बड़ा विरोधी बताते हुए टिप्पणियां प्रकाशित की गईं। वहीं सोशल मीडिया पर भी उनके निधन को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ग्राहम लंबे समय से ईरान के खिलाफ कड़े रुख और Israel (इजराइल) के समर्थन के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई मौकों पर ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की थी।
ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी के लिए क्यों अहम थे ग्राहम?:
लिंडसे ग्राहम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के करीबी सलाहकारों में गिना जाता था, विशेष रूप से विदेश नीति से जुड़े मामलों में। उनके निधन पर ट्रम्प ने उन्हें सच्चा राष्ट्रभक्त बताते हुए श्रद्धांजलि दी। रिपोर्टों के अनुसार, नवंबर 2026 में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ग्राहम फिर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। उनके निधन के बाद Republican Party (रिपब्लिकन पार्टी) को नया उम्मीदवार चुनना होगा।
इसके अलावा अमेरिकी सीनेट में उनकी अनुपस्थिति का असर महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी पड़ सकता है। वहीं विश्लेषकों का मानना है कि उनके निधन से यूक्रेन और इजराइल से जुड़े अमेरिकी राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वह इन दोनों देशों के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे।
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