सोनम वांगचुक का 9 किलो वजन घटा, बिना खाए कितने दिन जिंदा रहेंगे; क्या सरकार जबरन खाना खिला सकती है

सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk (सोनम वांगचुक) पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan (धर्मेंद्र प्रधान) के इस्तीफे से जुड़ी है। इस बीच सरकार की ओर से अब तक उनके साथ किसी औपचारिक बातचीत की जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं Delhi High Court (दिल्ली हाई कोर्ट) में दायर एक याचिका में उनकी बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए जबरन भोजन (फोर्स-फीडिंग) कराने की मांग की गई है। अदालत ने फिलहाल सरकार को उनके स्वास्थ्य की नियमित मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

हाई कोर्ट ने क्या दिए निर्देश?:
दिल्ली हाई कोर्ट में एक वकील की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि यदि समय रहते चिकित्सकीय हस्तक्षेप नहीं किया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन महत्वपूर्ण है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

स्वास्थ्य को लेकर क्या कहती हैं रिपोर्टें?:
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के समय सोनम वांगचुक का वजन 65.9 किलोग्राम था, जो 16 जुलाई तक घटकर 56.9 किलोग्राम रह गया। यानी उनका वजन करीब 9 किलोग्राम कम हो चुका है, जो लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट है। उनका रक्तचाप सामान्य 120/80 से घटकर 101/65 दर्ज किया गया है, जबकि ब्लड शुगर 89 यूनिट बताई गई है।

भुखमरी से संबंधित विभिन्न शोधों के अनुसार, यदि कोई दुबला-पतला व्यक्ति लंबे समय तक भोजन नहीं करता तो उसके शरीर के वजन में लगभग 18 प्रतिशत तक कमी आने के बाद जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। वहीं अधिक वजन वाले व्यक्ति अपेक्षाकृत कुछ अधिक समय तक बिना भोजन के जीवित रह सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, उम्र, पानी और नमक के सेवन जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।

डॉक्टरों की क्या है राय?:
Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) के चिकित्सक Ajay Singh (अजय सिंह) का कहना है कि उपलब्ध स्वास्थ्य मानकों को देखते हुए यह कहना उचित नहीं होगा कि अगले दो दिनों में ही जान को निश्चित खतरा है। उनके अनुसार, सोनम वांगचुक पानी का सेवन कर रहे हैं, इसलिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है। यदि जरूरत पड़ती है तो फीडिंग ट्यूब के माध्यम से ग्लूकोज और आवश्यक खनिज दिए जा सकते हैं।

वहीं Madhya Pradesh Medical Science University (मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी), Jabalpur (जबलपुर) के न्यूरोलॉजिस्ट Dr. T.N. Dubey (डॉ. टी.एन. दुबे) के अनुसार मेडिकल विज्ञान में यह तय नहीं है कि कोई व्यक्ति कितने दिन तक भूख सहन कर सकता है। उन्होंने बताया कि जब तक शरीर में कीटोसिस की गंभीर स्थिति विकसित नहीं होती, तब तक भूख हर व्यक्ति के लिए समान रूप से जानलेवा नहीं मानी जाती। यदि यह स्थिति बढ़ जाती है तो व्यक्ति कोमा जैसी गंभीर अवस्था में पहुंच सकता है।

क्या सरकार जबरन अनशन खत्म करा सकती है?:
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भूख हड़ताल अपनी बात रखने का एक माध्यम है और इसे Article 19 (अनुच्छेद 19) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा जाता है। वहीं Article 21 (अनुच्छेद 21) प्रत्येक नागरिक को जीवन का अधिकार देता है और सरकार पर जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी तय करता है।

इसी संदर्भ में Irom Chanu Sharmila (इरोम चानू शर्मिला) का मामला अक्सर उदाहरण के रूप में सामने आता है। वह वर्ष 2000 से 2016 तक लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहीं। उस दौरान उन्हें सरकारी अस्पताल में रखकर फीडिंग ट्यूब के माध्यम से भोजन दिया गया था। हालांकि बाद में Madras High Court (मद्रास हाई कोर्ट) ने एक मामले में कहा था कि केवल भूख हड़ताल के आधार पर किसी को आत्महत्या के प्रयास का आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?:
Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट) के अधिवक्ता Virag Gupta (विराग गुप्ता) का कहना है कि सोनम वांगचुक के मामले में आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज होने की संभावना नहीं है। हालांकि यदि जीवन बचाने की आवश्यकता महसूस होती है तो सरकार अनुच्छेद 21 के तहत आवश्यक कदम उठा सकती है। इसी आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी नियमित स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप के निर्देश दिए हैं।

CJP ने सरकार पर लगाया संवाद न करने का आरोप:
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में Cockroach Janta Party (कॉकरोच जनता पार्टी – CJP) भी आंदोलन कर रही है। संगठन के संस्थापक Abhijeet Dipke (अभिजीत दीपके) का आरोप है कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि संगठन की मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है और अब तक इस संबंध में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।

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