उत्तर प्रदेश के Rampur (रामपुर) स्थित Maulana Mohammad Ali Jauhar University (मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी) एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा में है। Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) की जांच और सुनवाई के बाद जिलाधिकारी Ajay Kumar Dwivedi (अजय कुमार द्विवेदी) ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी परिसर में अवैध घोषित निर्माणों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच में परिसर की कुल 40 इमारतों में से केवल दो भवनों का नक्शा स्वीकृत पाया गया, जबकि 38 इमारतों के संबंध में स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं मिला।
डीएम ने सुनाया फैसला, 15 दिन का समय:
जिलाधिकारी Ajay Kumar Dwivedi (अजय कुमार द्विवेदी) ने बताया कि नियमानुसार यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15 दिनों का समय दिया जाएगा, ताकि वह स्वयं अवैध निर्माण हटा सके। यदि निर्धारित अवधि के भीतर ऐसा नहीं किया जाता है, तो Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) अपने स्तर पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करेगा। प्रशासन के अनुसार आगे की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप की जाएगी।
38 भवन बिना स्वीकृत नक्शे के मिले:
Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) द्वारा की गई जांच में यूनिवर्सिटी परिसर की 40 इमारतों का परीक्षण किया गया। जांच में केवल दो भवनों के नक्शे स्वीकृत पाए गए, जबकि शेष 38 भवनों के लिए कोई स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं मिला। इसी आधार पर प्राधिकरण ने पहले नोटिस जारी कर यूनिवर्सिटी प्रशासन से जवाब मांगा था।
नोटिस के बाद प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष:
प्राधिकरण ने 1 जुलाई 2026 को यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि यदि भवन निर्माण के लिए कोई वैध अनुमति अथवा स्वीकृत नक्शा उपलब्ध है, तो उसके दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं। जवाब में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि जब भवनों का निर्माण कराया गया था, उस समय Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) अस्तित्व में नहीं था, इसलिए नक्शे स्वीकृत नहीं कराए जा सके। जिलाधिकारी ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और प्रबंधन को व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का एक और अवसर दिया।
सुनवाई में दोहराई गई पुरानी दलील:
बुधवार को हुई व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार ने पहले दी गई दलील को ही दोहराया। इस पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि उस समय क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में था और यूनिवर्सिटी के दो भवनों के नक्शे उसी संस्था से स्वीकृत कराए गए थे। प्रशासन का कहना है कि यदि दो भवनों के लिए अनुमति ली जा सकती थी, तो अन्य भवनों के लिए भी नियमानुसार स्वीकृति लेना आवश्यक था। सुनवाई पूरी होने के बाद अब अवैध घोषित भवनों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
डीएम ने नियमों की जानकारी होने की बात कही:
जिलाधिकारी Ajay Kumar Dwivedi (अजय कुमार द्विवेदी) ने बताया कि Singan Kheda (सींगन खेड़ा) स्थित यूनिवर्सिटी वर्ष 2024 के बाद Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) के अधिकार क्षेत्र में आई है। इससे पहले यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में था। उन्होंने कहा कि चूंकि दो भवनों के नक्शे जिला पंचायत से स्वीकृत कराए गए थे, इसलिए यह स्पष्ट है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नियमों और स्वीकृति प्रक्रिया की जानकारी थी। ऐसे में बाकी 38 भवनों के लिए अनुमति न लेना नियमानुसार उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024 के बाद जिला पंचायत से संबंधित निर्माण स्वीकृति और अवैध निर्माण हटाने जैसे अधिकार अब Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) के पास हैं और प्राधिकरण उन्हीं अधिकारों के तहत कार्रवाई कर रहा है।
आजम खान और परिवार से जुड़ा मामला:
पूर्व मंत्री और Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) के वरिष्ठ नेता Azam Khan (आजम खान) तथा उनके पुत्र Abdullah Azam (अब्दुल्ला आजम) 17 नवंबर 2025 से Rampur (रामपुर) जेल में बंद हैं। दोनों को दो पैन कार्ड रखने के मामले में Rampur (रामपुर) की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने सात वर्ष की सजा सुनाई थी। वहीं Tanzeen Fatima (तंजीन फातिमा) फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
कैसे हुई जौहर यूनिवर्सिटी की शुरुआत?:
वर्ष 2003 में Azam Khan (आजम खान) ने Maulana Mohammad Ali Jauhar Trust (मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट) की स्थापना की। इस ट्रस्ट में उनके परिवार के सदस्य भी शामिल किए गए। इसके बाद वर्ष 2005 में ट्रस्ट के माध्यम से Maulana Mohammad Ali Jauhar University (मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी) स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उसी वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav (मुलायम सिंह यादव) ने कैबिनेट के साथ Rampur (रामपुर) पहुंचकर 18 सितंबर 2005 को यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी।
निर्माण के साथ शुरू हुए विवाद:
यूनिवर्सिटी के निर्माण के दौरान भूमि अधिग्रहण को लेकर भी विवाद सामने आए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार Aliyaganj (आलियागंज) गांव के 26 किसानों से 35 बीघा भूमि खरीद को लेकर असहमति और विरोध की स्थिति बनी। यह घटनाक्रम 2005 से 2007 और बाद में 2012 से 2015 के बीच का बताया गया है। विरोध करने वाले लोगों ने विभिन्न आरोप लगाए, जबकि इन मामलों को लेकर लंबे समय से विवाद और मुकदमेबाजी जारी है।
1500 बीघे में फैला शिक्षण परिसर:
वर्ष 2017 तक यूनिवर्सिटी में बीए, बीएससी, बीटेक, बी फार्मा सहित 25 पाठ्यक्रम संचालित होने लगे थे। इन पाठ्यक्रमों के लिए परिसर में कई इमारतों का निर्माण किया गया। सपा शासनकाल में श्रम विभाग ने इन निर्माणों की लागत लगभग 2000 करोड़ रुपये बताई थी। यूनिवर्सिटी का परिसर करीब 1500 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है। भूमि खरीद और निर्माण से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर पिछले कई वर्षों से न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार Azam Khan (आजम खान) के खिलाफ दर्ज मामलों में बड़ी संख्या जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित है।
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