केशव मौर्य ने विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि में 12 अरब 40 करोड़ किए मंजूर

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya (केशव प्रसाद मौर्य) ने विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि के तहत वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए दूसरी किस्त के रूप में कुल 12 अरब 40 करोड़ रुपये की धनराशि जारी किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। यह धनराशि विधान सभा और विधान परिषद के सदस्यों के क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। प्रति सदस्य 2 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि दी जा रही है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन के ग्राम्य विकास विभाग की ओर से आवश्यक शासनादेश जारी कर दिया गया है।

विधान सभा और विधान परिषद के सदस्यों को मिलेगी धनराशि:

वित्तीय वर्ष 2026-2027 में विधान सभा के कुल 403 सदस्यों में से 397 सदस्यों के लिए प्रति सदस्य 250 लाख रुपये, जीएसटी सहित, की दर से कुल 9 अरब 92 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। विधान सभा में छह स्थान रिक्त हैं। वहीं विधान परिषद के कुल 100 सदस्यों में से 99 सदस्यों के लिए प्रति सदस्य 250 लाख रुपये, जीएसटी सहित, की दर से कुल 2 अरब 47 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। विधान परिषद में एक स्थान रिक्त है।

इस तरह विधानमंडल के कुल 503 सदस्यों में से 496 सदस्यों के लिए कुल 12 अरब 40 करोड़ रुपये, जीएसटी सहित, की धनराशि दूसरी किस्त के रूप में अवमुक्त किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें 397 विधान सभा सदस्य और 99 विधान परिषद सदस्य शामिल हैं।

निधि के इस्तेमाल को लेकर दिए गए निर्देश:

उप मुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya (केशव प्रसाद मौर्य) ने ग्राम्य विकास विभाग के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्वीकृत धनराशि का व्यय विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि के मार्गदर्शी सिद्धांतों और इस संबंध में समय-समय पर जारी शासनादेशों में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही किया जाए।

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आहरित की जाने वाली धनराशि संबंधित जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के जमा खाते में स्थानांतरित की जाएगी। इस जमा खाते से धनराशि का व्यय विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि के मार्गदर्शी सिद्धांतों तथा शासनादेशों के अनुरूप किया जाएगा।

वित्तीय नियमों के पालन पर जोर:

निर्देशों में व्यय प्रबंधन और शासकीय व्यय में मितव्ययिता के संबंध में वित्त विभाग की ओर से समय-समय पर जारी आदेशों का विशेष रूप से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके साथ ही राजकीय धन के व्यय में उत्तर प्रदेश बजट मैनुअल के प्रस्तर-12 में दी गई शर्तों की पूर्ति तथा वित्तीय औचित्य के मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि के तहत कराए जाने वाले कार्यों के सापेक्ष वास्तविक रूप से देय या आगणित जीएसटी के समतुल्य ही धनराशि का आहरण और व्यय किया जाएगा। निधि के उपयोग में निर्धारित वित्तीय प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

विकास कार्यों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी की:

विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित मुख्य विकास अधिकारी की होगी। संबंधित अधिकारियों को निधि से कराए जाने वाले कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

संबंधित जनपद के मुख्य विकास अधिकारी द्वारा स्वीकृत की जा रही धनराशि की जानकारी और शासनादेश की प्रति अपने-अपने जनपद से संबंधित विधान सभा तथा विधान परिषद सदस्यों को एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी।

पहली किस्त में भी जारी हुई थी धनराशि:

ज्ञातव्य है कि विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्यों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 में शासनादेश दिनांक 21 अप्रैल 2026 के माध्यम से पहली किस्त के रूप में 12 अरब 47 करोड़ 50 लाख रुपये, जीएसटी सहित, अवमुक्त किए गए थे।

अब दूसरी किस्त के रूप में कुल 12 अरब 40 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह धनराशि विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि के तहत निर्धारित नियमों और शासनादेशों के अनुसार विकास कार्यों में खर्च की जाएगी।

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