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‘आतंकी’ अब्दुल की जेल में हत्या, राम मंदिर उड़ाने की साजिश रची थी!
अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी साजिश के आरोपी अब्दुल रहमान की हरियाणा के फरीदाबाद स्थित फरीदाबाद जेल (Faridabad Jail, Haryana) में हत्या कर दी गई। यह घटना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में हुई, जहां उसके साथ बंद एक अन्य कैदी ने नुकीली वस्तु से उस पर जानलेवा हमला किया। जेल प्रशासन और पुलिस ने घटना की पुष्टि की है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

अब्दुल रहमान की उम्र करीब 20 वर्ष बताई गई थी। उसे मार्च 2025 में गुजरात एटीएस (Gujarat ATS) ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि उसका संपर्क अलकायदा इन इंडियन सब-कांटिनेंट (Al-Qaeda in the Indian Subcontinent – AQIS) से जुड़े आतंकी नेटवर्क से था। इसी मामले में वह न्यायिक हिरासत में फरीदाबाद जेल में बंद था।
गिरफ्तारी और जांच एजेंसियों का दावा:
मार्च 2025 में गुजरात एटीएस ने केंद्रीय एजेंसी आईबी (IB – Intelligence Bureau) की मदद से अब्दुल रहमान को हिरासत में लिया था। जांच के दौरान यह कहा गया कि वह AQIS से जुड़े आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए थे, जिन्हें बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेजा गया और आगे की जांच गुजरात एटीएस द्वारा की गई।

मिल्कीपुर में परिजनों का हाल:
अब्दुल रहमान अयोध्या के मिल्कीपुर (Milkipur, Ayodhya) का रहने वाला था। उसकी मौत की खबर मिलने के बाद गांव में शोक का माहौल बन गया। बताया गया कि शुरुआत में परिवार को यह जानकारी दी गई थी कि उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई है और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिवार को यह भी बताया गया कि उसके दिल में बचपन से ही सुराख था। बाद में जेल प्रशासन की ओर से मौत की आधिकारिक सूचना दी गई।

जेल प्रशासन का फोन और आगे की प्रक्रिया:
9 फरवरी की सुबह गांव के प्रधान के बेटे कैलाश जायसवाल के पास फरीदाबाद जेल प्रशासन की ओर से कॉल आया। जेल अधिकारियों ने बताया कि अब्दुल रहमान की मौत हो चुकी है और परिजनों को जल्द से जल्द फरीदाबाद पहुंचने के लिए कहा गया, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। इसके बाद अयोध्या से उसके पिता अबु बकर और चाचा उस्मान फरीदाबाद के लिए रवाना हुए। शव को बाद में अयोध्या लाया गया, जहां एक स्थानीय कब्रिस्तान में उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
सोशल मीडिया गतिविधियां और जांच का दायरा:
जांच एजेंसियों के अनुसार, अब्दुल रहमान पिछले करीब डेढ़ साल से सोशल मीडिया पर सक्रिय था। उसके पास से कुछ ऐसे वीडियो मिले थे, जिनमें राम मंदिर से जुड़ी जानकारियां थीं। शुरुआत में उसने टिकटॉक (TikTok) पर अकाउंट बनाकर भड़काऊ वीडियो डालने शुरू किए। टिकटॉक पर प्रतिबंध लगने के बाद वह इंस्टाग्राम (Instagram) पर सक्रिय हो गया। बार-बार भड़काऊ सामग्री डालने के कारण उसके अकाउंट पर कई बार कार्रवाई भी की गई थी। इन्हीं गतिविधियों के चलते वह जांच एजेंसियों के रडार पर आया।
एजेंसियों की निगरानी और गिरफ्तारी:
सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगातार स्ट्राइक आने के बाद हरियाणा एसटीएफ (Haryana STF), गुजरात एसटीएफ (Gujarat STF) और यूपी एसटीएफ (UP STF) ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। जांच के दौरान यह दावा किया गया कि फरीदाबाद में दो हैंड ग्रेनेड और डेटोनेटर छिपाए गए थे। बाद में 2 मार्च 2025 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे कथित साजिश को अंजाम देने से पहले ही रोका जा सका।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला:
एसटीएफ इंस्पेक्टर के बयान पर फरीदाबाद के डबुआ थाना (Dabua Police Station, Faridabad) में अब्दुल रहमान के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25(1)(ए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4(ए), 4(बी), 5 और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड लिया गया और आगे की जांच की गई।
सिक्योरिटी बैरक में मौजूद थे तीन कैदी:
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस सिक्योरिटी बैरक में यह घटना हुई, वहां कुल तीन कैदी बंद थे। इनमें एक उत्तर प्रदेश का अब्दुल रहमान और दो जम्मू-कश्मीर के अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट तथा शोएब रियाज शामिल थे। बताया गया कि पहले तीनों अलग-अलग बैरकों में रखे गए थे, लेकिन करीब 15 दिन पहले ही उन्हें एक ही हाई सिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट किया गया था।

राम मंदिर को लेकर विवाद:
जेल सूत्रों के मुताबिक, अरुण चौधरी और अब्दुल रहमान के बीच राम मंदिर को लेकर पिछले 10 दिनों से विवाद चल रहा था। बताया गया कि राम मंदिर बनने को लेकर अरुण चौधरी नाराज रहता था और इसी विषय पर दोनों के बीच कहासुनी होती थी। अरुण को यह भी जानकारी मिल गई थी कि अब्दुल रहमान पर राम मंदिर से जुड़ी साजिश का आरोप है, जिसके चलते विवाद और बढ़ गया।
सोते समय किया गया हमला:
जेल सूत्रों के अनुसार, यह घटना रात करीब 2 से 3 बजे के बीच हुई। उस समय अब्दुल रहमान और शोएब रियाज सो रहे थे, जबकि अरुण चौधरी जाग रहा था। आरोप है कि अरुण ने अचानक अब्दुल का मुंह दबाया और उसके सिर के पीछे नुकीली वस्तु से कई वार किए। शोर सुनकर शोएब रियाज जाग गया और उसने सुरक्षाकर्मियों को सूचना दी। कुछ ही देर में जेल अधिकारी मौके पर पहुंचे और घायल अब्दुल को जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
हत्या के बाद का माहौल:
सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद अरुण चौधरी शांत बैठा रहा, जबकि शोएब रियाज काफी घबराया हुआ था। बताया गया कि अरुण ने पहले से ही एक पत्थर को नुकीला बनाकर हथियार तैयार कर लिया था, जिसे उसने जेल परिसर से ही उठाया था। इसी हथियार से उसने हमला किया।
अरुण चौधरी का आपराधिक रिकॉर्ड:
अरुण चौधरी जम्मू जिले के आरएस पुरा सेक्टर (RS Pura Sector, Jammu) के गांव खौर देओनियन का रहने वाला बताया गया है। उसका नाम इससे पहले सांबा जिला (Samba District, Jammu and Kashmir) में हुए अक्षय शर्मा हत्याकांड में भी सामने आ चुका है। उस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और घटना सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीम किए जाने के कारण काफी चर्चा में रही थी।
फरीदाबाद जेल में शिफ्ट करने की वजह:
बताया गया कि पहले अरुण चौधरी को कठुआ जेल (Kathua Jail) में रखा गया था। बाद में उसने जेल प्रशासन पर रिश्वत और सुविधाएं देने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद अक्टूबर 2024 में उसे कठुआ जेल से फरीदाबाद की नीमका जेल (Neemka Jail, Faridabad) में शिफ्ट कर दिया गया था।
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