आजकल दोस्तों के साथ खाना-पीना साझा करना या एक ही कप से सिप लेना आम आदत बन गई है, लेकिन यह छोटी सी लापरवाही गंभीर वायरल संक्रमण का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी तरह की आदतों से ‘किसिंग डिजीज’ नामक संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जो मुख्य रूप से एप्सटीन बार वायरस (Epstein-Barr Virus – EBV) के कारण होता है।
क्या है किसिंग डिजीज:
किसिंग डिजीज एक वायरल संक्रमण है, जिसे चिकित्सा भाषा में ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस’ कहा जाता है। यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति की लार के संपर्क में आने से फैलती है। इसके फैलने के कई माध्यम हो सकते हैं, जैसे किसी को चूमना, एक ही ग्लास या बोतल का इस्तेमाल करना, छींक-खांसी के जरिए ड्रॉपलेट्स का संपर्क या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से संक्रमण।
वायरस के फैलने के प्रमुख कारण:
यह संक्रमण ज्यादातर मामलों में एप्सटीन बार वायरस के कारण होता है, जो शरीर में एक बार प्रवेश करने के बाद लंबे समय तक निष्क्रिय अवस्था में रह सकता है। इसके अलावा ब्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और अन्य शारीरिक संपर्क भी इसके फैलाव के कारण बन सकते हैं।
स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य:
अमेरिका के मायो क्लिनिक (Mayo Clinic, USA) द्वारा 2026 में की गई एक स्टडी में यह पाया गया कि जिन लोगों को जीवन में कभी इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस हुआ था, उनमें मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis – MS) का खतरा लगभग तीन गुना अधिक पाया गया। इस स्टडी में 19,000 लोगों को शामिल किया गया था और यह ‘न्यूरोलॉजी ओपेन एक्सेस’ (Neurology Open Access) में प्रकाशित हुई। आंकड़ों के अनुसार, मोनो से संक्रमित लोगों में MS का जोखिम 0.17% था, जबकि जिन लोगों को यह संक्रमण नहीं हुआ, उनमें यह खतरा 0.07% पाया गया।
किसिंग से बढ़ने वाले अन्य संक्रमण:
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल किसिंग डिजीज ही नहीं, बल्कि इस तरह के संपर्क से कई अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इनमें ओरल हर्पीज, स्ट्रैप थ्रोट और इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियां शामिल हैं। ये संक्रमण भी लार या ड्रॉपलेट्स के जरिए आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकते हैं।
किन लोगों को अधिक खतरा:
विशेषज्ञ डॉ. रोहित शर्मा (Dr. Rohit Sharma), कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल (Apollo Spectra Hospital, Jaipur) के अनुसार, जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें इस संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। साथ ही किशोर और युवा वर्ग में यह संक्रमण ज्यादा देखा जाता है, क्योंकि इस आयु वर्ग में सामाजिक संपर्क अधिक होता है।
सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय:
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। किसी के साथ बर्तन, बोतल या खाने की चीजें साझा करने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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