उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजीपुर (Ghazipur) में हुए कमलेश बिंद एनकाउंटर मामले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस पूरे प्रकरण पर राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य (Keshav Maurya) और मंत्री संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने सवाल खड़े किए हैं। दोनों नेताओं ने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। इस घटना को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
एनकाउंटर मामले की जांच की मांग:
उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य (Keshav Maurya) ने स्पष्ट कहा है कि गाजीपुर (Ghazipur) एनकाउंटर की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कई बार कठोर कदम उठाने पड़ते हैं, लेकिन किसी भी शिकायत की स्थिति में जांच आवश्यक है।
संजय निषाद का तीखा बयान:
मंत्री संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने इस मामले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विनीत राय हत्याकांड (Vineet Rai Murder Case) में मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं, ऐसे में केवल एक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद-बिंद समाज के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है और कुछ अधिकारी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहे हैं। संजय निषाद ने कहा कि इस मामले को वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के सामने उठाएंगे।
घटना की पृष्ठभूमि:
29 मई की रात गाजीपुर (Ghazipur) में होटल कारोबारी आलोक राय के पुत्र विनीत राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के पिता ने कटरा गैंग के सरगना शंकर पांडेय, सोनू यादव, कमलेश बिंद और मोनू त्रिपाठी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसके बाद 3 जून को पुलिस ने कमलेश बिंद को एनकाउंटर में ढेर कर दिया, जिस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। जबकि शंकर पांडेय, सोनू यादव और मोनू त्रिपाठी अभी भी फरार हैं, जिन पर 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का इनाम घोषित है।
सरकारी और राजनीतिक प्रतिक्रिया:
केशव मौर्य (Keshav Maurya) ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद कुछ लोग केवल सरकार की आलोचना में लगे हैं। वहीं उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी भी तरह की जांच से सरकार पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर दोषियों पर कार्रवाई होगी।
संजय निषाद के आरोप और सवाल:
लखनऊ (Lucknow) स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, लेकिन कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एनकाउंटर करना ही था तो मुख्य आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि मृतक की पत्नी ने पुलिस पर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, जिसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल:
संजय निषाद ने यह भी कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में आरोपी को अदालत में आत्मसमर्पण का अधिकार है, लेकिन कई बार पुलिस सीधे गिरफ्तारी कर रही है। उन्होंने स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संभावित घटनाओं की जानकारी समय रहते क्यों नहीं दी गई। उन्होंने शव ले जाने के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की कमी को भी प्रशासनिक चूक बताया।
रासुका और राजनीतिक बयानबाजी:
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (Rashtriya Suraksha Kanoon – RASUKA) को लेकर दी गई चेतावनी पर संजय निषाद ने कहा कि यदि कार्रवाई करनी है तो पहले उन पर रासुका लगाकर दिखाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद-बिंद समाज के साथ भेदभाव हो रहा है, जिसे समाज स्वीकार नहीं करेगा।
परिवार के आरोप:
कमलेश बिंद की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उनके पति निर्दोष थे और पुलिस उन्हें रामपुर (Rampur) से जबरन लाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने उन्हें थाने में बैठाए रखा और उनके सामने पति के साथ मारपीट की गई, जिसके बाद कथित तौर पर एनकाउंटर कर दिया गया।
निष्कर्ष:
गाजीपुर (Ghazipur) एनकाउंटर मामला अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है। जहां एक ओर सरकार जांच की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सहयोगी दल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
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