जौहर यूनिवर्सिटी नहीं टूटेगी, इसके पीछे 5 वजह:दिल्ली जैसे आंदोलन का डर; 3000 स्टूडेंट्स की शिफ्टिंग बड़ा चैलेंज

Rampur (रामपुर) स्थित Mohammad Ali Jauhar University (मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी) की 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण को लेकर मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। फिलहाल इन भवनों को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगी हुई है। Moradabad Division (मुरादाबाद मंडल) के कमिश्नर Anjaneya Kumar Singh (आंजनेय कुमार सिंह) ने 27 जुलाई को अगली सुनवाई तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी। इसी बीच Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) ने किसी भी संभावित कानूनी स्थिति को देखते हुए अदालत में पहले से कैविएट दाखिल कर रखा है, ताकि प्रशासन का पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश जारी न हो सके। वहीं, पिछले कई दिनों से यूनिवर्सिटी के छात्र परिसर के बाहर धरना दे रहे हैं।
ध्वस्तीकरण पर फिलहाल लगी है रोक:

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगने के बाद अब पूरा मामला अगली सुनवाई पर निर्भर हो गया है। प्रशासन की ओर से अदालत में कैविएट दाखिल किए जाने का उद्देश्य यह बताया गया है कि किसी भी न्यायिक आदेश से पहले प्रशासन का पक्ष भी सुना जाए। इस बीच यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर छात्रों का धरना जारी है और पूरे मामले पर सभी की निगाहें आगामी कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

विरोध प्रदर्शन और छात्रों की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय:

यूनिवर्सिटी के बाहर छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, परिसर में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की मौजूदगी और उनके विरोध के कारण यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि विरोध के बीच ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी। फिलहाल इस संबंध में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

यूनिवर्सिटी से जुड़े पक्षों के तर्क:

मामले में यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों का कहना है कि संस्थान का निर्माण वर्ष 2006 में शुरू हुआ था। उनके अनुसार उस समय संबंधित क्षेत्र में Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) का अधिकार क्षेत्र लागू नहीं था। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने Allahabad High Court (इलाहाबाद हाईकोर्ट) में याचिका दाखिल की है। दूसरी ओर, प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान यूनिवर्सिटी से भवनों के नक्शे भी मांगे गए, जिनमें मेडिकल कॉलेज और अकादमी ब्लॉक के नक्शे उपलब्ध कराए गए, जबकि अन्य भवनों के नक्शे प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

यूजीसी और शिक्षण व्यवस्था का भी हो रहा उल्लेख:

मामले को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि University Grants Commission (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-UGC) ने पूर्व में यूनिवर्सिटी को विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता प्रदान की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की विशेषज्ञ समिति ने संस्थान का निरीक्षण भी किया था। वहीं यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां विभिन्न पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन कर रहे हैं और आसपास इतने बड़े स्तर पर सभी विद्यार्थियों को स्थानांतरित करने की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

विवाद की पृष्ठभूमि और आगे की प्रक्रिया:

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2005 में Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) की सरकार के दौरान Rampur Development Authority (रामपुर विकास प्राधिकरण) का गठन किया गया था। बाद में वर्ष 2024 में प्राधिकरण की सीमा का विस्तार हुआ, जिसके बाद संबंधित गांव भी उसके दायरे में शामिल हो गया। इसके बाद जांच में 40 इमारतों में से केवल मेडिकल कॉलेज और प्रशासनिक भवन का नक्शा स्वीकृत होने की बात सामने आई, जबकि शेष 38 भवनों को लेकर नोटिस जारी किया गया। प्राधिकरण ने निर्धारित समय के भीतर भवन हटाने को कहा था, हालांकि अब पूरा मामला न्यायालय के विचाराधीन है।

नियमितीकरण के विकल्प पर भी चर्चा:

कानूनी जानकारों के अनुसार, न्यायालय केवल ध्वस्तीकरण के प्रश्न पर ही नहीं बल्कि अन्य वैधानिक विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। इसमें नियमानुसार शुल्क, जुर्माना अथवा अन्य देय राशि जमा कर निर्माण को नियमित करने जैसे पहलुओं पर भी चर्चा संभव है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय और संबंधित प्राधिकरण की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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