लखनऊ (Lucknow) के सरोजिनी नगर से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह (Dr. Rajeshwar Singh) ने उत्तर प्रदेश में नवाचार आधारित उद्यमशीलता को नई दिशा देने के उद्देश्य से आईआईएम लखनऊ (IIM Lucknow) के निकट एक मल्टी-इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन हब / स्टार्ट-अप फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं, नवप्रवर्तकों और स्टार्ट-अप उद्यमियों को एकीकृत सहायता तंत्र उपलब्ध कराना है, जिससे वे प्रारंभिक चुनौतियों को पार कर सकें।

आईआईएम लखनऊ में विचार-विमर्श:
हाल ही में आईआईएम लखनऊ में आयोजित एक शैक्षणिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने संस्थान के निदेशक प्रोफेसर एम. पी. गुप्ता (Professor M. P. Gupta) के साथ स्टार्ट-अप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में एक ऐसे केंद्रीकृत मंच की आवश्यकता पर बल दिया गया, जहां वित्त, अनुमोदन और अनुपालन से जुड़ी प्रक्रियाएं सरल और सुलभ हों।
स्टार्ट-अप्स के सामने शुरुआती चुनौतियाँ:
चर्चा में यह सामने आया कि अनेक नवप्रवर्तकों को शुरुआती चरण में वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, ऋण सुविधा, नियामकीय स्वीकृतियाँ, वैधानिक अनुपालन, प्रक्रियात्मक अनुमतियाँ, मार्गदर्शन और प्रौद्योगिकी सत्यापन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन जटिलताओं के कारण कई संभावनाशील विचार प्रारंभिक स्तर पर ही ठहर जाते हैं। प्रस्तावित केंद्र का उद्देश्य इन सभी सेवाओं को एक छत के नीचे उपलब्ध कराना है।
एकीकृत मॉडल की परिकल्पना:
डॉ. राजेश्वर सिंह ने सुझाव दिया है कि इस इनोवेशन हब में उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) के प्रमुख विभागों — आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, एमएसएमई विभाग, औद्योगिक विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, स्टार्टअप एवं इनोवेशन प्रकोष्ठ, इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) — का समन्वित सहयोग हो। इसके साथ ही स्टार्ट-अप इंडिया (Start-up India), मुद्रा (MUDRA), सीजीटीएमएसई (CGTMSE), सिडबी (SIDBI) जैसी योजनाओं तथा बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। इससे एक ऐसा तंत्र विकसित हो सकेगा जो नवाचार को नीतिगत, प्रशासनिक और वित्तीय समर्थन प्रदान करे।
राष्ट्रीय संस्थानों की बौद्धिक शक्ति का उपयोग:
इस प्रस्ताव का एक प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों की बौद्धिक क्षमता को उद्यमशीलता से जोड़ना है। आईआईएम लखनऊ जैसे संस्थानों की शैक्षणिक और शोध क्षमता को स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़कर नए विचारों को व्यावसायिक रूप देने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे प्रदेश में ज्ञान आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक उदाहरणों से प्रेरणा:
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ब्लॉक71 (Block71) सिंगापुर, कैम्ब्रिज इनोवेशन सेंटर (Cambridge Innovation Center) यूके, इज़राइल टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेटर्स प्रोग्राम (Israel Technology Incubators Program), पांग्यो टेक्नो वैली (Pangyo Techno Valley) दक्षिण कोरिया और सिलिकॉन वैली इकोसिस्टम (Silicon Valley ecosystem) अमेरिका जैसे वैश्विक मॉडल इस बात के उदाहरण हैं कि एकीकृत नवाचार केंद्र रोजगार और निवेश सृजन के प्रभावी इंजन बन सकते हैं। उनका मानना है कि इसी प्रकार का ढांचा उत्तर प्रदेश में भी स्थापित किया जाए तो युवाओं को बड़े स्तर पर अवसर मिल सकते हैं।
रोजगार और निवेश को नई गति:
प्रस्तावित इनोवेशन हब से प्रदेश में रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और नवाचार आधारित उद्योगों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई है। यह पहल युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला नवाचार-नेता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
#RajeshwarSingh #IIMLucknow #InnovationHub #StartupEcosystem
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।