राजा भैया, बृजभूषण, धनंजय को कैसे मिले हथियारों के लाइसेंस? हाईकोर्ट ने 19 बाहुबलियों पर मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने प्रदेश में गन कल्चर और प्रभावशाली लोगों को जारी शस्त्र लाइसेंसों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह, राजा भइया, धनंजय सिंह, सुशील सिंह और विनीत सिंह समेत कई बाहुबलियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने उन लोगों की आपराधिक कुंडली भी तलब की है, जिनके नाम सरकारी हलफनामों में शामिल नहीं किए गए थे। कोर्ट ने इन व्यक्तियों को मिली सरकारी सुरक्षा और उनके पास मौजूद असलहों का पूरा ब्यौरा 26 मई तक पेश करने का निर्देश दिया है।
संत कबीर नगर की याचिका पर सुनवाई:
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संत कबीर नगर (Sant Kabir Nagar) निवासी जयशंकर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के आवंटन और नवीनीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई। साथ ही यह भी कहा कि नियमों की अनदेखी और प्रभावशाली लोगों को मिलने वाली सुविधाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
गन कल्चर को लेकर कोर्ट की चिंता:
इससे पहले भी कोर्ट ने प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने मंडलवार जारी शस्त्र लाइसेंसों का पूरा विवरण मांगा था। इसके बाद अपर मुख्य सचिव (गृह) और संयुक्त सचिव की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। हलफनामे में सामने आए आंकड़ों को देखकर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।
हलफनामे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े:
सरकारी हलफनामे के अनुसार प्रदेश में वर्तमान समय में 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। अलग-अलग श्रेणियों में 23,407 आवेदन अब भी लंबित बताए गए हैं। वहीं 6,062 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे व्यक्तियों को भी शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए हैं। इसके अलावा 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस मौजूद होने की जानकारी भी कोर्ट को दी गई। पुलिस प्रमुखों और जिलाधिकारियों के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपीलें कमिश्नरों के पास लंबित हैं।
अधिकारियों के हलफनामे से असंतुष्ट कोर्ट:
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की ओर से पेश किए गए हलफनामे से वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। कोर्ट का मानना है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन कई बार राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़ी जानकारी छिपा लेता है। इसी वजह से कोर्ट ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जोनवार अपराधियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के लाइसेंसों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
सरकारी सुरक्षा और असलहों का मांगा ब्यौरा:
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि जिन बाहुबलियों और प्रभावशाली लोगों के नाम सूची में शामिल हैं, उन्हें किस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि उनके साथ कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं और उनके पास कितने असलहे मौजूद हैं। कोर्ट ने साफ किया कि सभी संबंधित अधिकारी जानकारी प्रस्तुत करते समय लिखित अंडरटेकिंग देंगे कि कोई भी तथ्य छिपाया नहीं गया है।
जानकारी छिपाने पर अधिकारियों को चेतावनी:
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी द्वारा कोई तथ्य छिपाया गया या गलत जानकारी दी गई, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। इसे कर्तव्य के प्रति जानबूझकर की गई लापरवाही माना जाएगा। कोर्ट ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों और पुलिस कमिश्नरों को पारदर्शिता के साथ रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
जोनवार मांगी गई आपराधिक जानकारी:
हाईकोर्ट ने नोएडा कमिश्नरेट (Noida Commissionerate), मेरठ जोन (Meerut Zone), आगरा जोन (Agra Zone), बरेली जोन (Bareilly Zone), लखनऊ जोन (Lucknow Zone), प्रयागराज जोन (Prayagraj Zone), वाराणसी जोन (Varanasi Zone) और गोरखपुर जोन (Gorakhpur Zone) समेत कई क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्तियों और बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली तलब की है। इनमें कई चर्चित नाम शामिल हैं, जिनके लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी।
प्रदेश में बढ़ सकती है निगरानी:
कोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों की प्रक्रिया और प्रभावशाली लोगों को दी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन और समीक्षा प्रक्रिया को और अधिक कड़ा किया जा सकता है।
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