रिपोर्टर: रविन्द्र चौधरी
मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट विरासत गलियारा अब अपने अंतिम स्वरूप की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने में नगर निगम की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। विरासत गलियारे को एक समान रंग और एक ही डिजाइन में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है, ताकि पूरे क्षेत्र में एकरूपता दिखाई दे और शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिले। इस दिशा में नगर निगम स्तर पर प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं और कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
नगर निगम की प्रमुख भूमिका:
विरासत गलियारा परियोजना को आकार देने में नगर निगम (Municipal Corporation) की सक्रिय भागीदारी सामने आ रही है। नगर निगम ने यह तय किया है कि गलियारे में आने वाले भवनों और प्रतिष्ठानों के लिए एक ही रंग और डिजाइन का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इससे न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि विरासत गलियारे की पहचान भी एक नजर में स्पष्ट हो सकेगी।
एक रंग और एक डिजाइन पर जोर:
परियोजना के तहत विरासत गलियारे में आने वाले सभी निर्माण और प्रतिष्ठानों को एक तय रंग और डिजाइन में विकसित किया जाएगा। नगर निगम की ओर से इसके लिए विशेष प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं, जिनमें यह स्पष्ट किया जा रहा है कि किस प्रकार का रंग और किस तरह का डिजाइन अपनाया जाना है। उद्देश्य यह है कि गलियारा देखने में एकरूप और आकर्षक नजर आए।
नगर निगम बनाएगा प्रोजेक्ट:
इस योजना के तहत नगर निगम की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट तैयार करने तक सीमित रहेगी। नगर निगम तकनीकी और डिजाइन से जुड़ा पूरा खाका तैयार कर देगा, ताकि कार्य में किसी तरह की असमंजस की स्थिति न रहे। प्रोजेक्ट के माध्यम से यह तय होगा कि किन मानकों के आधार पर रंग और डिजाइन का चयन किया जाएगा।
व्यापारियों को उठाना होगा खर्च:
विरासत गलियारा परियोजना में एक अहम पहलू यह भी है कि रंग और डिजाइन से जुड़ा पूरा खर्च नगर निगम नहीं उठाएगा। इस योजना के अनुसार, व्यापारी अपने स्तर से धनराशि लगाएंगे। यानी, भवनों और प्रतिष्ठानों को तय रंग और डिजाइन में रंगवाने का खर्च व्यापारियों को स्वयं वहन करना होगा। नगर निगम केवल मार्गदर्शन और प्रोजेक्ट उपलब्ध कराएगा।
महापौर से हुई बातचीत:
इस पूरे मामले को लेकर जब महापौर मंगलेश श्रीवास्तव (Manglesh Shrivastava) से बातचीत की गई, तो उन्होंने विरासत गलियारा परियोजना को शहर के लिए महत्वपूर्ण बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना से शहर की पहचान को नई दिशा मिलेगी और एक समान डिजाइन से विरासत गलियारे की सुंदरता में इजाफा होगा। साथ ही, नगर निगम और व्यापारियों के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने पर जोर दिया गया।
शहर की पहचान मजबूत करने की पहल:
विरासत गलियारा परियोजना का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को भी सहेजना है। एक रंग और एक डिजाइन की अवधारणा से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पूरा गलियारा एक साझा विरासत का प्रतीक है। नगर निगम की यह पहल शहर के विकास और व्यवस्थित स्वरूप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अंतिम चरण की तैयारी:
विरासत गलियारा अब धीरे-धीरे अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट तैयार करने का काम तेज किया जा रहा है और आने वाले समय में इसे धरातल पर उतारने की तैयारी है। नगर निगम और व्यापारियों के तालमेल से इस योजना को साकार करने की कोशिश की जा रही है, ताकि विरासत गलियारा अपने निर्धारित स्वरूप में नजर आ सके।
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