उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के पांचवें दिन कार्यवाही के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने कुछ समय के लिए सदन का माहौल गरमा दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होने के थोड़ी ही देर बाद टोका-टोकी की स्थिति बनी, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन का संचालन उनकी जिम्मेदारी है और अनावश्यक व्यवधान उचित नहीं है।
टोका-टोकी से बढ़ा तनाव:
विधानसभा में चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) की विधायक केतकी सिंह की ओर से हस्तक्षेप किए जाने पर अध्यक्ष सतीश महाना नाराज हो गए। उन्होंने सदस्य को बैठने के लिए कहा और दोहराया कि सदन को सुचारु रूप से चलाना उनका दायित्व है। स्थिति कुछ क्षणों के लिए तनावपूर्ण हो गई। नाराजगी के बीच उन्होंने अपने हेडफोन उतारकर मेज पर रख दिया और लगभग दस मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद वह कुर्सी छोड़कर बाहर चले गए।
स्थगन के बाद बदला माहौल:
निर्धारित समय के बाद जब अध्यक्ष पुनः सदन में लौटे तो वातावरण में हल्का बदलाव देखने को मिला। कांग्रेस (Indian National Congress) की विधायक आराधना मिश्रा ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की कि अध्यक्ष मुस्कुराते हुए अधिक अच्छे लगते हैं। उनकी इस टिप्पणी से सदन में हल्की मुस्कान दिखाई दी और माहौल कुछ सहज हुआ।
शायरी से मनाने की कोशिश:
इसी दौरान आराधना मिश्रा ने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि वह अध्यक्ष को मनाने के लिए शायरी सुनाएं। तभी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के विधायक कमाल अख्तर ने शेर पढ़ा— “तुम रूठा न करो, सबकी जान चली जाती है। तुम हंसते रहते हो, तो बिजली-सी चमक जाती है।” इस शायरी पर सदन में ठहाके भी सुनाई दिए और वातावरण कुछ हल्का हुआ।
वित्त मंत्री की प्रतिक्रिया:
शायरी के बाद वित्त मंत्री ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की ‘महबूबा वाली’ शायरी सदन में न सुनाई जाए। इसके बाद उन्होंने स्वयं भी कुछ पंक्तियां सुनाईं, जिससे माहौल और सहज हो गया। इस घटनाक्रम के बाद कार्यवाही सामान्य ढंग से आगे बढ़ी।
सदन संचालन पर अध्यक्ष का संदेश:
पूरे घटनाक्रम के दौरान अध्यक्ष सतीश महाना ने यह स्पष्ट कर दिया कि सदन की मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी प्रकार की अनावश्यक बाधा को स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि बाद की हल्की-फुल्की बातचीत और शायरी ने सदन के वातावरण को संतुलित कर दिया।
इस प्रकार बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में पहले तीखी नोकझोंक और फिर शायरी के जरिए माहौल को सामान्य करने की कोशिश देखने को मिली। अंततः कार्यवाही पुनः पटरी पर लौटी और निर्धारित एजेंडे के अनुसार चर्चा आगे बढ़ाई गई।
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