उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखनऊ (Lucknow), वाराणसी (Varanasi), अयोध्या (Ayodhya), मेरठ (Meerut) और मिर्जापुर (Mirzapur) स्थित अदालत परिसरों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। सभी स्थानों पर यह धमकी सरकारी ईमेल आईडी पर भेजे गए मेल के जरिए मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया तथा सुरक्षा के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से अदालत परिसरों को खाली करा लिया गया। एहतियातन कोर्ट की कार्यवाही रोक दी गई।
कोर्ट परिसरों को कराया गया खाली:
धमकी की सूचना सामने आते ही संबंधित जिलों में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। वाराणसी (Varanasi) में करीब तीन हजार से अधिक अधिवक्ताओं और लगभग पांच हजार वादकारियों ने जल्दबाजी में परिसर छोड़ दिया। जिला जज सहित न्यायिक अधिकारी भी सुरक्षा कारणों से बाहर आ गए। अन्य शहरों में भी अदालत परिसर को खाली कराकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया।
सुरक्षा एजेंसियों की गहन जांच:
पुलिस, डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ता परिसर के प्रत्येक हिस्से की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इसके अलावा एटीएस (ATS) और एसटीएफ (STF) को भी सतर्क किया गया है। फिलहाल जांच के दौरान किसी भी परिसर से संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
ईमेल के पैटर्न की जांच:
पुलिस के अनुसार, पांचों स्थानों पर प्राप्त ईमेल का प्रारूप लगभग एक जैसा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह सुनियोजित तरीके से भेजे गए हो सकते हैं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मेल किसने और कहां से भेजे। साइबर सेल तकनीकी विश्लेषण कर रही है और ईमेल के स्रोत का पता लगाने का प्रयास जारी है। यह भी जांच की जा रही है कि एक साथ कई शहरों को निशाना बनाने के पीछे क्या उद्देश्य हो सकता है।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी:
सूत्रों के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम पर लखनऊ (Lucknow) के वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं। संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारी समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संभावित खतरे को गंभीरता से लिया जाए और आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएं।
2007 वाराणसी घटना की पृष्ठभूमि:
वाराणसी (Varanasi) कोर्ट परिसर में 23 नवंबर 2007 को बम विस्फोट की घटना हुई थी, जिसमें तीन अधिवक्ताओं समेत नौ लोगों की मृत्यु हुई थी और लगभग पचास लोग घायल हुए थे। इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए इस बार मिली धमकी को भी अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पूर्व की घटनाओं से सीख लेते हुए सुरक्षा में किसी प्रकार की कमी नहीं रखी जाएगी।
एहतियात और आगे की कार्रवाई:
फिलहाल पांचों शहरों में तलाशी अभियान जारी है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अदालतों की कार्यवाही सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही पुनः शुरू की जाएगी। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। जांच एजेंसियां तकनीकी और मानवीय दोनों स्तर पर पड़ताल कर रही हैं ताकि धमकी देने वालों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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