गाजीपुर (Ghazipur) में भारत विकास परिषद (Bharat Vikas Parishad) की ओर से कजरी महोत्सव एवं रक्षाबंधन उत्सव का आयोजन आदर्श पैलेस, सरैयां में किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं और पुरुषों ने एक-दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर रक्षाबंधन की परंपरा निभाई। वहीं सावन के मौसम में महिलाओं ने पारंपरिक कजरी गीतों की प्रस्तुति देकर लोकगायन की इस विधा को जीवंत किया। कजरी गीतों की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
रक्षाबंधन उत्सव में बांधा रक्षा सूत्र:
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने एक-दूसरे को रक्षा सूत्र बांधा। इसके माध्यम से रक्षाबंधन से जुड़ी परंपरा और सामाजिक भाईचारे को बनाए रखने का संदेश दिया गया। आयोजन में परिषद परिवार के सदस्यों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
सावन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में लोक संस्कृति से जुड़ी कजरी को विशेष स्थान दिया गया। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति के माध्यम से सावन की भावनाओं और लोक परंपराओं को सामने रखा।
कजरी गीतों से जीवंत हुई लोक परंपरा:
कार्यक्रम के संयोजक संजय कुमार (Sanjay Kumar) ने परिषद परिवार को संबोधित करते हुए कजरी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कजरी उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रसिद्ध लोकगीत है। सावन के महीने में अपने प्रियजनों के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए कजरी का विशेष महत्व माना जाता है।
उन्होंने कहा कि कजरी लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और इसे त्योहारों तथा विशेष अवसरों पर गाया जाता है। कजरी का जुड़ाव शास्त्रीय संगीत से भी माना जाता है और इसे ठुमरी के साथ जोड़कर भी देखा जाता है।
बनारस और मिर्जापुर से जुड़ी कजरी की परंपरा:
संजय कुमार ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि कजरी की शुरुआत बनारस और मिर्जापुर से हुई। समय के साथ यह लोकगीत अन्य प्रदेशों में भी पहुंचा और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी परंपरा बनी रही।
उन्होंने कहा कि कजरी केवल पारंपरिक गीतों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि सामाजिक बंधन मजबूत करने का भी एक माध्यम है। सावन से इसके गहरे जुड़ाव के कारण इसे सावन का श्रृंगार भी कहा जाता है।
सावन और हरियाली से जुड़ा कजरी का भाव:
कार्यक्रम में कजरी के माध्यम से सावन और वर्षा ऋतु से जुड़े भावों को भी सामने रखा गया। संजय कुमार ने कहा कि भारत परंपराओं और ऋतुओं का देश है। भीषण गर्मी के बाद वर्षा होने पर लोगों को राहत मिलती है और चारों ओर हरियाली दिखाई देने लगती है।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं में भी हरियाली और प्रसन्नता दिखाई देती है। ऐसे वातावरण में कजरी जैसे लोकगीत सामाजिक संस्कारों और परंपराओं से लोगों का जुड़ाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद:
आयोजन में पुष्पेंद्र पांड, सत्यपाल सिंह, संतोष पाल, मनीष राज चौबे, राधा मोहन सिंह, सुभाष चंद्र, अभिषेक वर्मा, प्रेम कुमार सिंह, डॉ. डीपी सिंह, बृजभान सिंह, जयप्रकाश, सुशील अग्रवाल, धनंजय ओझा, विजय कुमार श्रीवास्तव, सुधीर सिंह, अरविंद कुमार राय, कृष्णा तिवारी, सुख विलास, अरुण कुमार राय, शिवकुमार, अनिल कुमार उपाध्याय, अतुल्य श्रीवास्तव, राजेश कुमार श्रीवास्तव और हरिवंश सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
महिलाओं में रीता सिंह, शालिनी सिंह, प्रतिभा सिंह, मोहिनी श्रीवास्तव, माया रानी, अल्का वर्मा, साक्षी सक्सेना, कल्पना भारद्वाज, रिंकी सिंह, मनोरमा राय, कंचन राय, सुमन यादव, रंजू देवी, रेनू बाला राय, निरुपमा उपाध्याय, संगीता राय, संध्या, नीतू यादव, प्रतिमा तिवारी, सीमा राय, डॉ. विष्णु प्रिया, ललिता केशरी, नीलम प्रकाश, सुषमा प्रकाश, माया नायर और सविता सिंह समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत:
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और विवेकानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पार्चन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। यह कार्य अनीता सिंह, अध्यक्ष अनीता यादव, कोषाध्यक्ष सिंधु सीता पाण्डेय, माधुरी यादव, अंजना राय, मनोरमा राय और जितेंद्र मोहन कृष्ण ने किया।
कार्यक्रम का संचालन सचिव सुमन लता राय ने किया। कजरी की प्रस्तुतियों और रक्षाबंधन उत्सव के बीच कार्यक्रम में लोक संस्कृति और सामाजिक परंपराओं का समावेश देखने को मिला। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी
