जमानियां (Zamania) में नगर पालिका परिषद की ओर से गृहकर, ट्रेड शुल्क और नामांतरण शुल्क में की गई वृद्धि को लेकर नगरवासियों, व्यापारियों और दुकानदारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शुल्क वृद्धि के विरोध में समस्त नगरवासियों की ओर से उप जिलाधिकारी जमानियां को ज्ञापन सौंपकर बढ़ाए गए शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है। ज्ञापनकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त आर्थिक भार से आम नागरिकों के साथ व्यापारियों और दुकानदारों पर भी असर पड़ रहा है।
गृहकर और ट्रेड शुल्क बढ़ाने का विरोध:
नगरवासियों की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि नगर पालिका परिषद जमानियां द्वारा नगर क्षेत्र में गृहकर, ट्रेड शुल्क और दो प्रतिशत नामांतरण शुल्क के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाला जा रहा है। लोगों का कहना है कि शुल्क में की गई वृद्धि से आम नागरिकों, व्यापारियों और दुकानदारों की परेशानियां बढ़ रही हैं।
ज्ञापनकर्ताओं ने मांग की कि नागरिकों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क की समीक्षा की जाए और बढ़ोतरी को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। उनका कहना है कि नगर पालिका को नागरिकों की समस्याओं और उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।
नामांतरण शुल्क को लेकर भी आपत्ति:
ज्ञापन में दो प्रतिशत नामांतरण शुल्क को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। नगरवासियों का कहना है कि नामांतरण के समय दो प्रतिशत नगर विकास शुल्क के नाम पर स्टांप पहले ही अदा किया जाता है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क की वृद्धि से नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

ज्ञापनकर्ताओं ने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किए जाने की मांग करते हुए कहा कि शुल्क में की गई वृद्धि का जनहित के दृष्टिकोण से परीक्षण किया जाना चाहिए।
जनता में असंतोष का जताया हवाला:
नगरवासियों के अनुसार गृहकर और अन्य शुल्कों में वृद्धि को लेकर नगर क्षेत्र में असंतोष है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अचानक और अधिक शुल्क बढ़ाना जनहित में उचित नहीं है।
ज्ञापन के माध्यम से उप जिलाधिकारी से आग्रह किया गया कि नगर पालिका परिषद जमानियां द्वारा बढ़ाए गए गृहकर, ट्रेड शुल्क और नामांतरण शुल्क के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार कराया जाए। इससे नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक भार से राहत मिलने के साथ ही लोगों में व्याप्त असंतोष भी समाप्त हो सकेगा।
बोर्ड के निर्णय की समीक्षा की मांग:
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि शुल्क वृद्धि किसी प्रस्ताव या नगर पालिका बोर्ड के निर्णय के आधार पर की गई है तो उसकी दोबारा समीक्षा की जाए। ज्ञापनकर्ताओं ने जनहित को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है।
नगरवासियों का कहना है कि शुल्क से संबंधित किसी भी निर्णय में आम नागरिकों, व्यापारियों और दुकानदारों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
15 दिन में फैसला वापस लेने की मांग:
ज्ञापनकर्ताओं ने बढ़े हुए गृहकर और अन्य शुल्कों को वापस लेने के लिए 15 दिनों की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर शुल्क वृद्धि वापस नहीं ली गई तो जमानियां नगर की जनता अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी।
नगरवासियों ने अपनी मांग को लेकर प्रशासन से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि शुल्क वृद्धि वापस होने से नागरिकों पर पड़ रहा अतिरिक्त आर्थिक भार कम होगा।
जिलाधिकारी और नगर विकास मंत्री को भी भेजी प्रतिलिपि:
शुल्क वृद्धि के विरोध में दिए गए ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी गाजीपुर (Ghazipur) और नगर विकास मंत्री, उत्तर प्रदेश को भी भेजी गई है। इसके माध्यम से संबंधित अधिकारियों के सामने भी नगरवासियों की मांग रखी गई है।
ज्ञापन देने वालों में रामनिवास प्रसाद, मुन्ना गुप्ता, मेराज हसन, शोएबा खान सहित नगर के कई नागरिक, व्यापारी और दुकानदार मौजूद रहे।
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रिपोर्टर: जफ़र इकबाल
