लखनऊ (Lucknow), 22 अगस्त। राम मंदिर में घंटा चोरी के मामले सहित संत समाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर शनिवार को संत समाज ने शांत मार्च निकाला। 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में निकाला गया यह मार्च गांधी प्रतिमा से मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचा। मार्च का नेतृत्व संत प्रकाश जी महाराज (Sant Prakash Ji Maharaj), अनिल वर्मा (Anil Verma), सुजीत महाराज (Sujit Maharaj) और सूरज (Suraj) ने किया। संत समाज की ओर से मुख्यमंत्री को 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपने की बात कही गई।
घंटा चोरी मामले में कमेटी बदलने की मांग:
संत समाज की ओर से दिए गए ज्ञापन में राम मंदिर में घंटा चोरी के मामले को लेकर पुरानी कमेटी को हटाने की मांग की गई। संतों ने कमेटी में संतों को शामिल करने और किसी आम व्यक्ति को कमेटी में स्थान नहीं दिए जाने की मांग रखी।
संत समाज का कहना है कि मंदिर से जुड़े मामलों में संतों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी को लेकर ज्ञापन में कमेटी के गठन से संबंधित मांग को प्रमुखता से शामिल किया गया।
संतों के लिए निःशुल्क यात्रा सुविधा की मांग:
ज्ञापन में संत-महात्माओं के लिए निःशुल्क बस और रेल पास उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। इसके साथ ही संतों की यात्रा सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहचान-पत्र जारी करने की मांग की गई, ताकि वे बस और ट्रेन से यात्रा कर सकें।
संत समाज ने कहा कि संतों के लिए पहचान-पत्र जारी होने से उनकी यात्रा से जुड़ी सुविधा सुनिश्चित हो सकेगी। 11 सूत्रीय मांगों में इस व्यवस्था को भी शामिल किया गया है।
मंदिर की परिधि में शराब-मांस की बिक्री रोकने की मांग:
संत समाज ने मंदिर की परिधि के दो किलोमीटर के भीतर मदिरा और मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। ज्ञापन में धार्मिक स्थलों के आसपास के वातावरण से जुड़ी इस मांग को भी प्रमुखता से रखा गया।
संत समाज की ओर से कहा गया कि मंदिर की परिधि से जुड़े क्षेत्र में इस प्रकार की बिक्री पर रोक लगाई जानी चाहिए।
आश्रम और धार्मिक स्थलों की समस्याओं के समाधान पर जोर:
ज्ञापन में संत-महात्माओं के आश्रमों और धार्मिक स्थलों से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने की मांग की गई। संत समाज ने धार्मिक स्थलों में आवश्यक मरम्मत कराने और आमजन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
इसके साथ ही संतों की सुरक्षा और सम्मान के लिए अलग व्यवस्था किए जाने की मांग की गई। संत समाज ने कहा कि आश्रमों और धार्मिक स्थलों से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान होना चाहिए।
जनकल्याण कार्यों को प्रोत्साहन देने की मांग:
11 सूत्रीय ज्ञापन में संत-महात्माओं द्वारा किए जा रहे जनकल्याण और सेवा कार्यों को शासन स्तर पर प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने की मांग भी शामिल है। संत समाज ने अपने सेवा कार्यों के लिए शासन की ओर से प्रोत्साहन दिए जाने की बात रखी।
इसके अलावा संत समाज की मांगों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा शीघ्र कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में संत प्रतिनिधिमंडल के साथ समय-समय पर शासन और प्रशासन की बैठक आयोजित करने की बात भी कही गई है, ताकि संतों के सुझावों पर चर्चा हो सके।
शासन की गोष्ठियों में विशिष्ट अतिथि बनाने की मांग:
संत समाज ने शासन की ओर से आयोजित की जाने वाली गोष्ठियों में संत-महात्माओं को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने की मांग की। ज्ञापन में संत समाज की भागीदारी बढ़ाने से जुड़ी इस मांग को भी शामिल किया गया।
संत समाज ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को शासन के समक्ष रखते हुए उनसे गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा जताई।
11 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई की उम्मीद:
शांत मार्च के माध्यम से संत समाज ने अपनी विभिन्न मांगों को सामने रखा। मार्च गांधी प्रतिमा से मुख्यमंत्री आवास तक निकाला गया। इस दौरान 11 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपने की बात कही गई।
संत समाज ने उम्मीद जताई कि ज्ञापन में शामिल मांगों पर शासन गंभीरता से विचार करेगा और संबंधित विषयों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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