रिपोर्टर: सऊद अंसारी
गाज़ीपुर में सड़क सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल देखने को मिली। रौजा तिराहे पर मूक-बधिर वाहन चालकों के सम्मान और पहचान को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा के आदेश के क्रम में आयोजित हुआ, जिसमें यातायात प्रभारी मनीष कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस और समाज के विभिन्न वर्गों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं था, बल्कि मूक-बधिर लोगों के प्रति समाज की सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना भी था। आयोजन स्थल पर आम नागरिकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि Deaf logo क्या होता है, इसका महत्व क्या है और सड़क पर ऐसे वाहन चालकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का उद्देश्य और संदेश:
इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “Deaf logo को पहचानो” अभियान को आगे बढ़ाना था। मूक-बधिर वाहन चालक सुनने में असमर्थ होते हैं, ऐसे में सड़क पर उन्हें हॉर्न या अन्य ध्वनि संकेतों का आभास नहीं हो पाता। इसी कारण उनके वाहनों पर Deaf logo लगाया जाना बेहद जरूरी माना जाता है, ताकि अन्य वाहन चालक सतर्क रहें और दुर्घटनाओं से बचाव हो सके। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मूक-बधिर चालक भी समाज का सम्मानित हिस्सा हैं और उनके प्रति सहानुभूति व जिम्मेदारी दिखाना हर नागरिक का दायित्व है।
बाइक रैली के माध्यम से जागरूकता:
कार्यक्रम के अंतर्गत मूक-बधिर वाहन चालकों के वाहनों के आगे और हेलमेट के पीछे Deaf logo का स्टिकर लगाया गया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों को एक बाइक रैली के लिए रवाना किया गया। यह रैली रौजा तिराहे से होकर आसपास के प्रमुख मार्गों से गुजरी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग Deaf logo को देखें, समझें और इसके महत्व से परिचित हो सकें। रैली के दौरान यातायात पुलिस कर्मियों ने भी लोगों को नियमों का पालन करने और मूक-बधिर चालकों के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की।

पुलिस और समाज की संयुक्त पहल:
इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। यातायात प्रभारी मनीष कुमार त्रिपाठी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि Deaf logo की पहचान से न सिर्फ मूक-बधिर चालकों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि अन्य वाहन चालकों में भी जिम्मेदारी का भाव पैदा होगा। इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि सड़क पर सभी के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जा सके।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग:
इस जागरूकता अभियान में समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। कार्यक्रम में सहजानंद (प्रधान मंडल कोषाध्यक्ष, वाराणसी), मनीष सिंह (एक्स मेंबर), आशुतोष सिंह (एक्स मेंबर), अनुज (एक्स मेंबर), मुरारी और मनीष प्रमुख रूप से शामिल रहे। इनके साथ-साथ कुल 25 मूक-बधिर लोगों ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई और बाइक रैली का हिस्सा बने।

मूक-बधिर चालकों के लिए सम्मान का संदेश:
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि Deaf logo केवल एक स्टिकर नहीं, बल्कि एक पहचान और सुरक्षा कवच है। आम जनमानस को यह समझाने का प्रयास किया गया कि सड़क पर ऐसे चालकों के साथ धैर्य और समझदारी से पेश आना चाहिए। यह पहल मूक-बधिर समुदाय के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
सड़क सुरक्षा की दिशा में आगे की राह:
गाज़ीपुर में आयोजित यह कार्यक्रम यह संकेत देता है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर प्रयास करें, तो सड़क सुरक्षा और सामाजिक समावेशन दोनों को मजबूत किया जा सकता है। Deaf logo को लेकर फैलाई गई यह जागरूकता आने वाले समय में दुर्घटनाओं को कम करने और मूक-बधिर चालकों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में सहायक साबित हो सकती है।

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म खेलो इंडिया नॉर्थ जोन किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में शाह फैज पब्लिक स्कूल गाज़ीपुर की दो बेटियों ने पंचम लहरायाया अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
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