लखनऊ की पहचान और खानपान की विरासत मानी जाने वाली इदरीस बिरयानी एक बार फिर चर्चा में है। जिस इदरीस बिरयानी पर शहर को गर्व है, उसी प्रतिष्ठित नाम पर लखनऊ नगर निगम (Lucknow Nagar Nigam) ने झूठे आरोप लगाते हुए चालान काट दिया। इस कार्रवाई के बाद न सिर्फ बिरयानी प्रेमियों में नाराजगी है, बल्कि शहर की खाद्य विरासत को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि नगर निगम की ओर से इदरीस बिरयानी पर गंदगी फैलाने का आरोप लगाते हुए चालान किया गया, जिसे दुकान संचालकों और समर्थकों ने पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई बिना ठोस जांच के की गई और शहर की सांस्कृतिक पहचान को ठेस पहुंचाने जैसी है।
नगर निगम की कार्रवाई से बढ़ा विवाद:
लखनऊ नगर निगम (Lucknow Nagar Nigam) की इस कार्रवाई के बाद मामला तूल पकड़ने लगा। आरोप है कि निगम की टीम ने बिना समुचित निरीक्षण और साक्ष्य के गंदगी का आरोप लगाया और चालान काट दिया। इदरीस बिरयानी से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्षों से यह प्रतिष्ठान साफ-सफाई और गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए अपनी सेवाएं देता आ रहा है। ऐसे में अचानक गंदगी का आरोप लगाना न केवल गलत है, बल्कि छवि धूमिल करने जैसा भी है।
खाने की विरासत को बनाया गया निशाना:
इदरीस बिरयानी को सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि लखनऊ की खानपान परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीढ़ियों से यह बिरयानी स्वाद और पहचान का प्रतीक रही है। ऐसे प्रतिष्ठान पर झूठा आरोप लगना शहर की सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने जैसा है। लोगों का यह भी कहना है कि प्रशासन को किसी भी कार्रवाई से पहले तथ्यों की सही जांच करनी चाहिए थी।
यूनेस्को (UNESCO) से जुड़ा सम्मान:
इदरीस बिरयानी के नाम से जुड़ा यह भी दावा किया जा रहा है कि इसे यूनेस्को (UNESCO) से अवार्ड मिल चुका है। यही कारण है कि इस कार्रवाई को लेकर असंतोष और ज्यादा गहरा हो गया है। समर्थकों का कहना है कि जिस प्रतिष्ठान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान मिला हो, उसके साथ इस तरह की कार्रवाई करना समझ से परे है।
स्थानीय लोगों और ग्राहकों में रोष:
नगर निगम की कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों और नियमित ग्राहकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि इदरीस बिरयानी लखनऊ की पहचान है और इसे बदनाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन से उठे सवाल:
इस पूरे मामले ने लखनऊ नगर निगम (Lucknow Nagar Nigam) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि सच में कोई कमी थी तो पहले सुधार का मौका दिया जाना चाहिए था, न कि सीधे झूठे आरोप लगाकर चालान काटा जाए। इस घटना के बाद प्रशासन से पारदर्शिता और निष्पक्षता की अपेक्षा की जा रही है।
शहर की पहचान और जिम्मेदारी:
लखनऊ अपनी तहजीब और खानपान के लिए जाना जाता है। ऐसे में इदरीस बिरयानी जैसे प्रतिष्ठित नाम पर उठे सवाल न केवल एक दुकान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे शहर की छवि से जुड़े हुए हैं। लोगों का मानना है कि प्रशासन और संबंधित संस्थानों को शहर की विरासत को सहेजने और सम्मान देने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
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