गाजीपुर जिला जेल में छठ की आस्था: महिला बंदियों ने रखा व्रत, बना तालाब
गाजीपुर (Ghazipur) में लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) की भक्ति लहर अब जेल की दीवारों के भीतर भी पहुंच गई है। गाजीपुर जिला जेल (District Jail) में बंद महिला बंदियों ने पूरे श्रद्धा और परंपरा के साथ छठ व्रत रखा। इस अवसर पर जेल प्रशासन ने व्रती महिलाओं के पूजन-अर्चन के लिए विशेष व्यवस्था की और उनके लिए एक कृत्रिम तालाब भी तैयार करवाया।
छठ महापर्व पर महिला बंदियों की भक्ति:
गाजीपुर जिला जेल में कुल 32 महिला बंदियां हैं, जिनमें से 6 महिला बंदियों ने सूर्योपासना का व्रत रखा। इन व्रती महिलाओं ने परंपरागत रीति से छठ पूजा का पालन किया। उन्होंने पूरे दिन निर्जल रहकर छठ मइया और सूर्य देव की आराधना की तथा अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। जेल परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
जेल प्रशासन ने की विशेष व्यवस्था:
महिला बंदियों की आस्था को देखते हुए जेल प्रशासन ने उनके पूजन के लिए जेल परिसर में एक अस्थायी तालाब बनवाया। यही नहीं, प्रशासन ने छठ पूजा में आवश्यक सभी सामग्रियों का इंतजाम भी किया, ताकि व्रती महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पूजा सामग्री में सूप, फल, ठेकुआ, दीप और प्रसाद की सभी वस्तुएं उपलब्ध कराई गईं।
परंपरागत तरीके से हुआ पूजन:
व्रती महिला बंदियों ने छठ महापर्व को पूरी निष्ठा और परंपरा के अनुसार मनाया। उन्होंने तालाब के किनारे दीप जलाकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मानसिक शांति की प्रार्थना की। इस अवसर पर अन्य महिला बंदियों ने भी पूजा में सहयोग किया और भक्ति गीतों के माध्यम से माहौल को और अधिक पवित्र बना दिया।
आस्था का प्रतीक बना जेल परिसर:
जेल में छठ पर्व के आयोजन ने यह साबित किया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती। जेल प्रशासन के सहयोग और महिला बंदियों की श्रद्धा ने यह दिन यादगार बना दिया। गाजीपुर जिला जेल में इस आयोजन ने न केवल परंपरा का सम्मान किया बल्कि समाज में आस्था और समानता का संदेश भी दिया।
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