October 13, 2026

बलिया रेलवे स्टेशन से हटाया गया अशोक स्तंभ, विरोध तेज

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रिपोर्ट: अमित कुमार



Ballia: रेलवे स्टेशन परिसर से राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ को हटाने का मामला सामने आया है, जिसे लेकर स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। राष्ट्रीय समानता दल ने रेलवे प्रशासन पर राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने का आरोप लगाया है और तत्काल पुनर्स्थापना की मांग की है।

राष्ट्रीय समानता दल का विरोध

राष्ट्रीय समानता दल के नेताओं का कहना है कि अशोक स्तंभ भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक है, जो शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और सद्भाव का संदेश देता है। चार शेरों के साथ यह स्तंभ देश के गौरव और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।


दल ने रेलवे प्रशासन द्वारा इसे हटाने को दुर्भावनापूर्ण और अनुचित कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह कदम न केवल प्रतीक का अपमान है, बल्कि जनता की भावनाओं के खिलाफ भी है।

ज्ञापन और मांगें

राष्ट्रीय समानता दल ने स्टेशन अधीक्षक के माध्यम से भारतीय रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में अशोक स्तंभ को अतिशीघ्र पुनः स्थापित करने की मांग की गई है। दल का कहना है कि यह कार्रवाई रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को चुनौती देती है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अशोक स्तंभ का महत्व केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह देश की एकता और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। इसे हटाने से स्थानीय लोगों और यात्रियों में असंतोष बढ़ सकता है।

प्रतीक का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

अशोक स्तंभ भारत के गौरव और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। इसकी संरचना और चार शेर देश की शक्ति और सामर्थ्य को दर्शाते हैं। राष्ट्रीय समानता दल ने कहा कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई जो इस प्रतीक की गरिमा को ठेस पहुँचाए, उसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्तंभ महत्वपूर्ण है। यह यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की याद दिलाता है। इसलिए इसे हटाने के फैसले के खिलाफ दल ने जोरदार विरोध जताया है।

आगे की संभावनाएं

अशोक स्तंभ हटाने को लेकर अब सभी की निगाहें रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई और रेलवे बोर्ड की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। दल और स्थानीय समुदाय यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि राष्ट्रीय प्रतीक को सुरक्षित और सम्मानित स्थान पर रखा जाए।

रेलवे प्रशासन ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विरोध के बढ़ते स्वर और ज्ञापन के बाद जल्द ही स्थिति पर स्पष्टीकरण की संभावना है।

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