रिपोर्ट: हसीन अंसारी
Ghazipur: रेवतीपुर ब्लॉक के टौगा प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया। स्कूल के शिक्षक और स्टाफ एक बच्चे को स्कूल में छोड़कर चले गए, जिससे छात्र घंटों तक अंदर बंद रहा। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कई घंटों बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बच्चे की सलामती को लेकर हड़कंप
जानकारी के अनुसार, बच्चा अपने भाई के साथ स्कूल आया था। पढ़ाई के बाद वह क्लासरूम में सो गया, जबकि शिक्षक और अन्य स्टाफ स्कूल छोड़ कर चले गए। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर पास के ग्रामीण जमा हुए और उन्होंने तत्काल प्रशासन को सूचना दी। गनीमत यह रही कि स्कूल की एक खिड़की खुली थी, जिससे आवाज बाहर जा सकी और ग्रामीणों को घटना का पता चला।
ग्रामीणों ने बच्चे की मदद के लिए तुरंत हेडमास्टर और स्टाफ के संपर्क में आने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। कई घंटों की कोशिशों के बाद आखिरकार बच्चा सुरक्षित बाहर निकाला गया।
प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का किया निर्देश
बच्चे की सुरक्षा और इस लापरवाही की गंभीरता को देखते हुए, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने स्कूल हेडमास्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। बीएसए ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही शिक्षा विभाग की छवि पर गंभीर प्रभाव डालती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में सुधार की मांग
इस घटना ने स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में सख्त निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाने की आवश्यकता है। बच्चों को अकेला छोड़कर जाना, चाहे अनजाने में ही क्यों न हो, गंभीर परिणाम दे सकता है।
एक स्थानीय अभिभावक ने कहा, “यदि समय रहते बच्चे को बाहर नहीं निकाला गया होता, तो क्या होता, इसका अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता। शिक्षकों की लापरवाही से बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती है।”
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
बीएसए ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस मामले की पूरी जांच कर जिम्मेदार शिक्षकों और स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही विभाग स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और निगरानी बढ़ाने की योजना बना रहा है।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और स्टाफ की जिम्मेदारी को किस स्तर तक गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए शीघ्र कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।
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