अयोध्या के भदरसा क्षेत्र से जुड़े नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आए अदालती फैसले के बाद पीड़िता का परिवार गहरे सदमे और आक्रोश में है। परिवार का कहना है कि जो कुछ उनकी बेटी के साथ हुआ, उसे भुला पाना असंभव है। मां ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हुई और जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। परिवार ने सुरक्षा की मांग करते हुए आगे की कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है।
कोर्ट के फैसले पर परिवार की प्रतिक्रिया:
पाक्सो कोर्ट की जज निरुपमा विक्रम ने मामले में आरोपी मोईद खान को बरी कर दिया, जबकि उसके नौकर राजू खान को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा और जुर्माना सुनाया गया। फैसले के बाद पीड़िता की मां ने कहा कि मोईद खान ने गलत किया, यह सभी जानते हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। परिवार का कहना है कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं और उनकी ओर से प्रभावी पैरवी नहीं हो सकी। मां का आरोप है कि पुलिस ने भी जांच ठीक से नहीं की, जिसके कारण यह स्थिति बनी।
सजा पर असंतोष और आगे की लड़ाई:
राजू खान को मिली सजा पर प्रतिक्रिया देते हुए पीड़िता की मां ने कहा कि उनकी बेटी की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है और ऐसे अपराध में दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। परिवार ने साफ कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ आगे हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता:
मां ने बताया कि आरोपियों के जेल में रहने के दौरान भी परिवार डर के साए में था। अब मोईद खान के बरी होने की खबर से डर और बढ़ गया है। परिवार लंबे समय से घर के भीतर ही रहने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस की निगरानी रहती थी, लेकिन अब वह भी कम हो गई है। घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के सहारे ही वे खुद को सुरक्षित महसूस करने की कोशिश कर रहे हैं।
डीएनए रिपोर्ट पर सवाल:
परिवार ने डीएनए जांच रिपोर्ट को लेकर भी असंतोष जताया। मां का कहना है कि जांच में कुछ गड़बड़ी हुई है और रिपोर्ट पर उन्हें भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण सच्चाई सामने नहीं आ सकी। उन्होंने कहा कि जो कुछ उनकी बेटी के साथ हुआ, उसे कोई रिपोर्ट नहीं बदल सकती।
मामले की पृष्ठभूमि:
29 जुलाई 2024 को अयोध्या के भदरसा इलाके में 12 वर्षीय नाबालिग ने गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में मोईद खान और उसके नौकर राजू खान को आरोपी बनाया गया था। पीड़िता उस समय गर्भवती थी। कोर्ट के आदेश पर 7 अगस्त 2024 को लखनऊ के क्वीन मेरी अस्पताल (Queen Mary Hospital) में गर्भपात कराया गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसे डराकर और धमकाकर लंबे समय तक शोषण किया गया। अदालत में सुनवाई के बाद मोईद खान को बरी कर दिया गया, जबकि राजू खान को दोषी ठहराया गया।
आगे की राह:
परिवार का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ेंगे और कानूनी रास्ते से अपनी बात आगे रखेंगे। साथ ही उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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