उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) 17 अगस्त से 26 अगस्त तक अवकाश पर हैं। वह अपने गृह राज्य गुजरात (Gujarat) गई हैं और इस अवकाश के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) से अनुमति ली गई है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनने के बाद यह पहली बार है, जब आनंदीबेन पटेल इतनी लंबी छुट्टी पर गई हैं। उनके अचानक अवकाश पर जाने के बाद सियासी और प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इस बीच यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि उत्तर प्रदेश को जल्द नया राज्यपाल मिल सकता है। हालांकि, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव सुधीर बोवड़े (Sudhir Bawde) ने पदभार से मुक्त किए जाने या राज्यपाल को बदले जाने की चर्चाओं को खारिज किया है। उनका कहना है कि आनंदीबेन पटेल सिलवासा (Silvassa) और दमन दीव (Daman and Diu) के भ्रमण पर हैं। इस दौरान उनकी वहां के राज्यपाल से मुलाकात भी प्रस्तावित है।
लंबी छुट्टी के बाद अटकलों को मिला जोर:
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार का कहना है कि आनंदीबेन पटेल इससे पहले भी अवकाश पर जा चुकी हैं। गुजरात में उनका पूरा परिवार रहता है। उनकी बेटी अनार पटेल चुनावी राजनीति में उतर रही हैं। आनंदीबेन पटेल लंबे समय से उत्तर प्रदेश में रह रही हैं और राज्यपाल के तौर पर करीब सात साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी हैं।
राजेंद्र कुमार के मुताबिक जब तक उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति नहीं होती, तब तक उनके राज्यपाल पद पर बने रहने की संभावना है। यही वजह है कि उनके हर अवकाश को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि अगर छुट्टी पूरी होने के बाद आनंदीबेन पटेल वापस नहीं आती हैं, तभी इसे किसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में राज्यपाल की ओर से राज्य सरकार की व्यवस्था को लेकर की गई टिप्पणियों के कारण भी उनके अवकाश को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ा है।
कार्यकाल को लेकर भी उठ रहे सवाल:
वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह के अनुसार आनंदीबेन पटेल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और इसे औपचारिक रूप से बढ़ाए जाने की जानकारी नहीं है। ऐसे में लंबी छुट्टी को लेकर अटकलें लगना स्वाभाविक है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि राज्यपाल अपना कार्यकाल बढ़ाए जाने को लेकर दबाव बना रही हों।
सुरेश बहादुर सिंह का कहना है कि देश के कुछ राज्यों में राज्यपाल बदले जाने की प्रक्रिया हो चुकी है। आनंदीबेन पटेल गुजरात से हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से उनकी निकटता रही है। उनके मुताबिक कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाए जाने की स्थिति में यह भी संभव है कि उन्हें सम्मानजनक तरीके से पद से हटने को लेकर संकोच हो या उन्हें पद से हटाए जाने का अंदेशा हो। हालांकि, ये बातें राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों के तौर पर कही जा रही हैं।
हाल के बयानों से भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा:
आनंदीबेन पटेल 29 जुलाई 2019 से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं। पिछले कुछ समय में उन्होंने विश्वविद्यालयों, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सख्त टिप्पणियां की हैं। उनकी इन टिप्पणियों को लेकर भी चर्चा होती रही है।
गोरखपुर (Gorakhpur) में उन्होंने छात्रावास की खराब व्यवस्था और भोजन को लेकर टिप्पणी की थी। वहीं कानपुर (Kanpur) के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Chandra Shekhar Azad University of Agriculture and Technology) के दीक्षांत समारोह में भी उन्होंने व्यवस्थाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया था और दोबारा समीक्षा करने की बात कही थी।
14 अगस्त को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (Bundelkhand University) के दीक्षांत समारोह में भी आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों को लगातार बेहतर बनाने और छात्राओं से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया था।
हवाई यात्रा को लेकर भी हुई चर्चा:
राज्यपाल की यात्राओं को लेकर भी हाल के दिनों में चर्चाएं सामने आई हैं। कुछ कार्यक्रमों में उनके ट्रेन से यात्रा करने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, ऐसा हर यात्रा में नहीं हुआ। 5 अगस्त को गोरखपुर में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Madan Mohan Malaviya University of Technology) के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए उनके राजकीय विमान से पहुंचने की आधिकारिक जानकारी सामने आई थी।
राज्यपाल के स्वास्थ्य को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य कारणों से डॉक्टरों ने उन्हें हवाई यात्रा से बचने की सलाह दी थी। हालांकि, उनके अवकाश और यात्रा को लेकर सामने आ रही चर्चाओं में आधिकारिक तौर पर किसी नए राजनीतिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
छह राज्यों में राज्यपाल बदलने की चर्चा:
देश के छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति को लेकर भी अटकलें चल रही हैं। उत्तर प्रदेश और गुजरात के राज्यपाल लंबे समय से अपने पद पर हैं। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (Rajendra Vishwanath Arlekar) के पास तमिलनाडु (Tamil Nadu) का अतिरिक्त प्रभार भी है। उन्हें मार्च 2026 में यह जिम्मेदारी दी गई थी।
आनंदीबेन पटेल ने 29 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभाली थी और उनका कार्यकाल सात साल से अधिक हो चुका है। उनके बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत (Acharya Devvrat) हैं, जिन्होंने 22 जुलाई 2019 को पद संभाला था। तीसरे नंबर पर मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के राज्यपाल मंगुभाई पटेल (Mangubhai Patel) हैं।
फिलहाल आनंदीबेन पटेल के अवकाश को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव की ओर से पदभार से मुक्त किए जाने या बदले जाने की अटकलों को खारिज किया जा चुका है। ऐसे में उनके अवकाश से जुड़ी अंतिम स्थिति उनके वापस लौटने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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