कम उम्र में हार्टअटैक के लिए सिर्फ घी-तेल जिम्मेदार नहीं:अपोलो हॉस्पिटल के चेयरमैन बोले- 300 साल पहले आए अकाल से जीन्स में बदलाव हुआ

युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को लेकर अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप (Apollo Hospitals Group) के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। उनके मुताबिक इसके पीछे जीवनशैली के साथ-साथ जीन और आनुवंशिक बनावट की भूमिका भी हो सकती है।

डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने बताया कि करीब 300 साल पहले पड़े एक अकाल का असर लोगों की आनुवंशिक संरचना पर पड़ा था। उनके अनुसार उस समय के अकाल से जुड़े प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और इसी वजह से दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।

युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं को लेकर जताई चिंता:

डॉ. रेड्डी के अनुसार जब उन्होंने देश में काम करना शुरू किया था, तब भी बड़ी संख्या में युवा लोगों को हृदय संबंधी समस्याओं के साथ देखा जाता था। उन्होंने 1991 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब ड्यूटी रूम में तीन भारतीय डॉक्टरों की मौत के बाद युवाओं में हार्ट अटैक को लेकर काफी चर्चा हुई थी।

उस समय युवाओं में हार्ट अटैक के लिए शारीरिक गतिविधियों की कमी और घी तथा नारियल तेल जैसी चीजों को जिम्मेदार माना जाता था। हालांकि, बाद में हुई रिसर्च में यह सामने आया कि दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा उनके जीन और आनुवंशिक बनावट से भी जुड़ा हो सकता है।

युवाओं को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

डॉ. रेड्डी का कहना है कि युवाओं को हार्ट अटैक के खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहिए। स्वास्थ्य की नियमित जांच, संतुलित खान-पान और रोजाना शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी है। साथ ही अपनी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी डॉक्टर की सलाह के अनुसार करनी चाहिए।

हार्ट अटैक के खतरे को लेकर समय रहते सतर्क रहना महत्वपूर्ण बताया गया है। शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को केवल थकान या सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज करने के बजाय जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया गया है।

हार्ट अटैक से पहले शरीर में दिख सकते हैं बदलाव:

दी गई जानकारी के मुताबिक हार्ट अटैक का खतरा अचानक सामने आने के बजाय लंबे समय पहले शरीर में कुछ बदलावों के रूप में दिखाई दे सकता है। कुछ अध्ययनों में ऐसे संकेतों के कई साल पहले शुरू होने की बात सामने आई है। कई बार लोग इन बदलावों को थकान या उम्र से जुड़ी सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

ऐसे में शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी चिंता की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर स्वास्थ्य जांच से हृदय से जुड़ी समस्या का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

दिल की सेहत के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी:

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सप्ताह में करीब 150 मिनट व्यायाम करने की सलाह दी गई है। तेज चलना, योग या साइकिल चलाना शारीरिक गतिविधि के विकल्प हो सकते हैं। अधिक उम्र के लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शुरुआत करने की बात कही गई है।

नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ रोजाना की दिनचर्या में सक्रिय बने रहना भी जरूरी बताया गया है। पेट की अतिरिक्त चर्बी और बढ़ते वजन को नियंत्रित करने के लिए रोजाना टहलना मददगार हो सकता है।

खान-पान और वजन पर रखें नियंत्रण:

दिल की सेहत के लिए खान-पान पर ध्यान देना भी जरूरी है। तेल और घी का सेवन सीमित रखने के साथ फल और सब्जियों को भोजन में अधिक शामिल करने की सलाह दी गई है। नमक और चीनी की मात्रा को भी नियंत्रित रखना चाहिए।

दालें और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ भी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। इसके साथ ही वजन को नियंत्रण में रखना और विशेष रूप से पेट की चर्बी कम करने पर ध्यान देना जरूरी बताया गया है।

तनाव और नींद का भी रखें ध्यान:

तनाव को नियंत्रित करने के लिए ध्यान और अपनी पसंद की गतिविधियों या शौक का सहारा लिया जा सकता है। तनाव कम रखने से हृदय की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लेने की सलाह दी गई है। अगर किसी व्यक्ति को खर्राटों की समस्या रहती है तो उसे डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही गई है।

धूम्रपान और शराब से दूरी जरूरी:

दिल की सेहत के लिए धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने पर भी जोर दिया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार इनसे हृदय की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए हृदय को स्वस्थ रखने के लिए इनसे बचना जरूरी बताया गया है।

नियमित स्वास्थ्य जांच से रहें सतर्क:

रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराने की सलाह दी गई है। साल में कम से कम एक बार इनकी जांच कराने की बात कही गई है। जिन लोगों के परिवार में हृदय संबंधी बीमारी का इतिहास रहा है, उन्हें स्वास्थ्य जांच शुरू करने को लेकर डॉक्टर की सलाह लेने की जरूरत बताई गई है।

कुल मिलाकर युवाओं में हृदय संबंधी जोखिम को लेकर सतर्कता, नियमित जांच, संतुलित खान-पान, शारीरिक सक्रियता, पर्याप्त नींद और तनाव पर नियंत्रण को महत्वपूर्ण बताया गया है।

Disclaimer:

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