‘आपकी हिम्मत कैसे हुई?’, CJP प्रोटेस्ट पर मजिस्ट्रेट ने छात्र को भेजा नोटिस तो भड़क उठे CJI सूर्यकांत

प्रयागराज के झूंसी निवासी छात्र अक्षत त्रिपाठी गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) से बीए-एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं। वह Students Federation of India (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। 4 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ Noida Commissionerate (नोएडा कमिश्नरेट) के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया। नोटिस में उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किए जाने को लेकर जवाब मांगा गया था।

नोटिस में कहा गया था कि यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि अक्षत त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। साथ ही उन पर छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाया गया। नोटिस में ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।

छह महीने तक पाबंद करने का दिया गया नोटिस:

अक्षत त्रिपाठी से पूछा गया था कि क्यों न उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए। इसके लिए उनसे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई थी।

हालांकि बाद में पुलिस की जांच में नोटिस को लेकर स्थिति बदल गई। ACP Ravi Shankar (एसीपी रवि शंकर) के अनुसार, जांच के दौरान अक्षत त्रिपाठी का नाम सामने आया था। पुलिस को जानकारी मिली थी कि वह जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने गए थे। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें वॉट्सऐप के जरिए नोटिस भेजा था।

जांच में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं मिला छात्र:

ACP रवि शंकर ने बताया कि 5 सितंबर को नोटिस रद्द कर दिया गया। छानबीन के दौरान पता चला कि संबंधित समय में अक्षत त्रिपाठी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आई जानकारी के आधार पर नोटिस को कैंसिल कर दिया गया।

ACP ने यह भी बताया कि इससे पहले नवंबर में अक्षत त्रिपाठी ने आत्महत्या करने की बात कहते हुए एक वीडियो बनाया था। यह वीडियो वायरल होने के बाद वह गायब हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश की थी।

छात्र ने वीडियो जारी कर कार्रवाई पर उठाए सवाल:

अक्षत त्रिपाठी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उन्हें धमकाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना या पेपर लीक जैसे मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना क्या अपराध है।

अक्षत ने कहा कि इसी मामले में ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट की ओर से उन्हें नोटिस मिला था। इसमें पांच लाख रुपये का निजी बॉन्ड देने को कहा गया। उन्होंने कहा कि वह छात्र हैं और उनकी कोई व्यक्तिगत आय नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त उनके लिए किस तरह व्यावहारिक है, यह भी उन्होंने सवाल के रूप में उठाया।

पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर भी सवाल:

छात्र ने अपने वीडियो में नोटिस में लगाए गए आरोपों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, नोटिस में कहा गया था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन में शामिल होकर उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काया।

अक्षत ने सवाल उठाया कि सरकार की नीति की आलोचना करना, सरकार से सवाल पूछना या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना भड़काने की श्रेणी में कैसे आ सकता है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार और प्रमाण को लेकर भी सवाल किया।

उन्होंने दावा किया कि वह करीब तीन महीने से विश्वविद्यालय गए ही नहीं हैं और 20 जुलाई के प्रदर्शन से करीब डेढ़ महीने पहले अपने घर इलाहाबाद आ चुके थे। ऐसे में उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों को कैसे भड़काया, यह उन्होंने अपने वीडियो में पूछा। अक्षत ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी छात्र ने दिया हवाला:

अक्षत त्रिपाठी ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसके बारे में दी गई जानकारी के अनुसार नौ दिन पहले CJP आंदोलन से जुड़ी सभी एफआईआर रद्द की गई थीं। बताया गया है कि यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा।

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ मामले चलते रहेंगे। ये एफआईआर 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद दर्ज की गई थीं।

अक्षत ने अपने वीडियो में पूरे मामले को लोकतंत्र में सवाल पूछने और सरकार की नीतियों की आलोचना से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं पुलिस की ओर से बताया गया कि जांच के दौरान प्रदर्शन स्थल पर छात्र की मौजूदगी नहीं मिली और 5 सितंबर को नोटिस रद्द कर दिया गया।

#Tags: #AkshatTripathi #GautambuddhaUniversity #SFI #Noida #CJPProtest #BNSS

Disclaimer:

यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading