‘किस सरकारी दस्तावेज में आपका नाम टीपू है? हर्जाना लूंगा’, अखिलेश यादव पर भड़क उठे निशिकांत दुबे, पूछे 3 सवाल
Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) के प्रमुख Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) और Bharatiya Janata Party (भारतीय जनता पार्टी) के सांसद Nishikant Dubey (निशिकांत दुबे) के बीच सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद Nishikant Dubey (निशिकांत दुबे) ने उसका जवाब देते हुए अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक की है। उन्होंने नोटिस को तथ्यों के आधार पर गलत बताते हुए कई सवाल भी उठाए हैं। वहीं, यह मामला पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
निशिकांत दुबे ने साझा किया नोटिस का जवाब:
Nishikant Dubey (निशिकांत दुबे) ने बुधवार सुबह अपने X (एक्स) अकाउंट पर मानहानि नोटिस के जवाब की प्रति साझा की। उन्होंने लिखा कि उन्होंने नोटिस का जवाब पहले ही भेज दिया है। अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने सवाल उठाया कि कथित रूप से किस व्यक्ति की मानहानि हुई है। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि सरकारी दस्तावेजों में Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) का नाम किस रूप में दर्ज है। इसके अलावा उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उन्हें और उनकी ओर से मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है तथा इसका कानूनी खर्च वह संबंधित पक्ष से वसूलने का प्रयास करेंगे।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद:
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह दावा किया गया कि Ayodhya (अयोध्या) के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी टिन्नू यादव और Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) के बीच फोन पर बातचीत होती थी। इसी संदर्भ में 5 जुलाई को Nishikant Dubey (निशिकांत दुबे) ने X (एक्स) पर एक पोस्ट करते हुए इशारों में टिप्पणी की थी। इसके बाद Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) ने पोस्ट हटाने की चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि निर्धारित समय में पोस्ट नहीं हटाई गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मानहानि नोटिस के बाद बढ़ा विवाद:
इसके बाद Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) की ओर से प्रदेश अध्यक्ष KK Pal (केके पाल) के माध्यम से Nishikant Dubey (निशिकांत दुबे) को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया। नोटिस में कथित आपत्तिजनक पोस्ट हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद Prayagraj (प्रयागराज), Etawah (इटावा) सहित कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया और पुलिस को शिकायत पत्र सौंपे।
चार दिनों से जारी है जुबानी जंग:
पिछले चार दिनों से दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। Nishikant Dubey (निशिकांत दुबे) ने 5 जुलाई को Saravanna Prasad Balasubramaniam (सरवन्ना प्रसाद बालासुब्रमण्यम) की एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें पुलिस जांच और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कुछ दावे किए गए थे। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने टिप्पणी की थी। इसके बाद Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) ने इसे झूठा प्रचार बताते हुए संसदीय परंपरा, सभ्यता और भगवान राम की मर्यादा का उल्लेख किया तथा इसे उनकी पार्टी और पीडीए गठबंधन को बदनाम करने का प्रयास बताया।
दोनों पक्षों ने रखी अपनी-अपनी बात:
Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) द्वारा दी गई चेतावनी के बाद भी Nishikant Dubey (निशिकांत दुबे) ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक प्रश्न पूछा है और यदि आवश्यकता हुई तो वह अदालत का रुख करेंगे। दूसरी ओर, मानहानि नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मानहानि हुई है तो कानून के अनुसार शिकायत उसी व्यक्ति की ओर से दर्ज होनी चाहिए।
सपा नेताओं ने भी उठाए सवाल:
इस पूरे मामले पर Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) के Ayodhya (अयोध्या) से पूर्व विधायक Pawan Pandey (पवन पांडेय) ने भी वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है और अब फोन कॉल को लेकर झूठा दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास बातचीत के प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि संबंधित आरोप प्रमाणित हो जाते हैं तो वह राजनीति से संन्यास लेने को तैयार हैं।
टिन्नू यादव को लेकर क्या सामने आया:
मामले में जिस Tinnu Yadav (टिन्नू यादव) का नाम सामने आया है, उसे लेकर बताया गया है कि वह Ayodhya (अयोध्या) का निवासी है और पहले Champat Rai (चंपत राय) का ड्राइवर था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह इस समय जेल में है। SIT (एसआईटी) की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि उसके पास मंदिर की हुंडियों की चाबियों और संबंधित व्यवस्थाओं तक पहुंच थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उसकी सिफारिश पर एक अन्य व्यक्ति को गणना कार्य में लगाया गया था, जो बाद में चोरी के मामलों में संलिप्त पाया गया। रिपोर्ट में इसे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक बताया गया है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भी आई प्रतिक्रिया:
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर Ram Mandir Trust (राम मंदिर ट्रस्ट) के कोषाध्यक्ष Swami Govind Dev Giri (स्वामी गोविंद देव गिरि) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार Champat Rai (चंपत राय) का इस पूरे मामले से कोई चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता, लेकिन उन्होंने पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित ड्राइवर के पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इसी बीच ट्रस्ट के नए महासचिव Krishna Mohan Das (कृष्ण मोहन दास) ने भी अपना कार्यभार संभाल लिया है।
नोट: इस खबर में उल्लिखित आरोप संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों, सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है तथा अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।
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