बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) से बाहर किए जाने के बाद आकाश आनंद (Akash Anand) ने शुक्रवार को पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपनी बुआ और बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) से माफी मांगते हुए कहा कि वह उनकी राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और बुआ मां हैं। आकाश आनंद ने कहा कि राजनीति में उन्होंने जो कुछ सीखा है, वह मायावती से ही सीखा है और वह उनके नेतृत्व में दोबारा पार्टी तथा मिशन की सेवा करने का अवसर चाहते हैं।
मायावती से माफी मांगते हुए कही ये बात:
आकाश आनंद ने अपने संदेश में मायावती के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि राजनीति में उन्होंने जो कुछ सीखा और किया, वह उनके मार्गदर्शन में किया। उन्होंने कहा कि उनकी चुप्पी को गलत समझा गया। यदि उनकी चुप्पी से मायावती को ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए उनसे क्षमा चाहते हैं।
आकाश आनंद ने कहा कि वह केवल मायावती के नेतृत्व में फिर से पार्टी और बहुजन आंदोलन की सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वास केवल शब्दों से नहीं, बल्कि काम और आचरण से बनाया जाता है। उनका संदेश बसपा में दोबारा सक्रिय भूमिका पाने की इच्छा के तौर पर सामने आया है।
दूसरी पार्टी में जाने की अटकलों को खारिज किया:
आकाश आनंद ने अपने संदेश में दूसरी राजनीतिक पार्टी में जाने की अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बसपा उनके लिए केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि उनका परिवार है।
दरअसल, बसपा से बाहर किए जाने के बाद आकाश आनंद को लेकर दूसरी राजनीतिक पार्टियों में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उनके इस संदेश के बाद उन्होंने इन चर्चाओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को बसपा से ही जोड़ते हुए मायावती के नेतृत्व में काम करने की इच्छा जताई है।
ससुर को पार्टी से निकालने के फैसले का समर्थन:
आकाश आनंद ने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ (Ashok Siddharth) को पार्टी से बाहर किए जाने और उनके राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को भी सही बताया। उन्होंने कहा कि वह मायावती के इस फैसले के साथ खड़े हैं।
आकाश आनंद ने कहा कि रिश्ते अपनी जगह हैं, लेकिन मिशन उनसे बड़ा है। उन्होंने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी तथा आंदोलन के हित को रखना अपनी जिम्मेदारी बताया। यह टिप्पणी उनके ससुर से जुड़े राजनीतिक विवाद के संदर्भ में सामने आई है। मायावती ने भी आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को अशोक सिद्धार्थ के पार्टी से अलग होने के फैसले से जोड़ा था।
आकाश को कई बार मिली जिम्मेदारी और फिर हटाया गया:
आकाश आनंद को बसपा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं और बाद में उनसे वापस भी ली गईं। 10 दिसंबर 2023 को मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके बाद मई 2024 में उन्हें उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारियों से हटा दिया गया था। बाद में जून 2024 में उन्हें दोबारा इन जिम्मेदारियों में लाया गया।
मार्च 2025 में आकाश आनंद से फिर जिम्मेदारियां वापस ले ली गईं और उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। बाद में उन्हें दोबारा बसपा में शामिल किया गया और संगठन में जिम्मेदारी दी गई। सितंबर 2026 में उन्हें फिर राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटाया गया और इसके बाद पार्टी से अलग कर दिया गया।
सितंबर में पार्टी से बाहर किए गए आकाश:
3 सितंबर 2026 को मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटा दिया था। इसके बाद 9 सितंबर को उन्हें पार्टी से पूरी तरह अलग करने का फैसला सामने आया। मायावती ने आकाश के राजनीतिक रुख और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़े मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
इसके बाद 23 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद (Ishan Anand) को बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया। यह नियुक्ति आकाश को पार्टी से बाहर किए जाने के कुछ दिनों बाद हुई। हालांकि, ईशान को संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने के बावजूद आकाश की ओर से अब मायावती के नेतृत्व में दोबारा काम करने की इच्छा जताई गई है।
आकाश ने फिर मांगा पार्टी में सेवा का मौका:
आकाश आनंद के ताजा संदेश में मायावती से माफी मांगने के साथ ही पार्टी में दोबारा सेवा करने की इच्छा स्पष्ट रूप से सामने आई है। उन्होंने खुद को किसी दूसरे राजनीतिक दल से जोड़ने की संभावनाओं को खारिज करते हुए बसपा को अपना परिवार बताया है।
अब आकाश आनंद के इस सार्वजनिक संदेश पर मायावती की प्रतिक्रिया और पार्टी की ओर से आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल आकाश ने अपने संदेश के जरिए मायावती के नेतृत्व में दोबारा काम करने का अवसर मांगा है।
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