अफजाल अंसारी को जीत की आस
बाहुबली बन गये राजभर के ख़ास?
ये लड़ाई तो दशकों पुरानी है
भाजपा को नयी रणनीति बनानी है?
चर्चा तो विकास पुरुष के विकास की है
उम्मीद तो भाजपा के प्रयास की है
लेकिन एंट्री तो राजभर के ख़ास की है
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उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहाँ काशी यानि वाराणसी पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है तो वहीँ आज भी लहुरी काशी यानि गाजीपुर पूर्वांचल की राजनीति के केंद्र में है. पूर्वांचल में माफिया का ठप्पा मुख्तार अंसारी पर लगा है तो वहीँ डॉन की उपाधि बृजेश सिंह को मिली है. अब भला बृजेश सिंह को कौन नहीं जानता. कभी काशी आइये, बच्चा बच्चा आपको पूरा बायोडाटा बता देगा. खैर सवाल ये है कि अब चर्चा बृजेश सिंह की क्यों हो रही है तो आगे पढ़िए …
बृजेश सिंह को ओपी राजभर दे सकते हैं टिकट : सूत्र
उत्तर प्रदेश की गाजीपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने अफजाल अंसारी को प्रत्याशी बनाया है जिसे लेकर सियासत गरमा गई है, अफजाल अंसारी, मुख्तार अंसारी के भाई हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि अफजाल अंसारी के सामने इस बार प्रत्याशी कौन होगा? सियासी जानकारों की मानें तो अफजाल के सामने ब्रजेश सिंह को उतारा जा सकता है.
ग़ाज़ीपुर में सपा ने अपना पत्ता चल दिया है अब बीजेपी की बारी है. ऐसे में पूर्वांचल की इस सीट पर बेहद दिलचस्प मुक़ाबला देखने को मिल सकता है. ब्रजेश सिंह की पहचान भी बाहुबली की है. अंसारी परिवार और ब्रजेश सिंह के बीच पुरानी अदावत रही है. ऐसे में ब्रजेश सिंह को बीजेपी की सहयोगी ओपी राजभर अपनी पार्टी के सिंबल पर गाजीपुर से चुनाव लड़ाया जा सकता है.बताया जा रहा है कि पिछले दिनों 16 फरवरी ब्रजेश सिंह और राजभर की वाराणसी में मुलाक़ात भी हो चुकी है. यानी पूर्वांचल में महामुकाबले की जमीन तैयार होने लगी है.
अंसारी परिवार से भी है ओम प्रकाश राजभर के रिश्ते
हो सकता है सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर बृजेश सिंह को टिकट दें लेकिन बृजेश सिंह के दुश्मन कहे जाने वाले अंसारी परिवार से भी ओम प्रकाश राजभर के पुराने रिश्तें हैं. ऐसे में लोगो का कहना है कि राजनीति में सब कुछ संभव है. सपा पर माफियाओं से रिश्ते का आरोप लगाते लगाते भले क्यों न खुद डॉन को गले लगाना पड़े. सवाल तो कुर्सी का है भईया अब चाहे भले ही क्यों न नितीश कुमार जी के पद चिन्हों पर चलना हो.
अब क्या करेगी LG मनोज सिन्हा की सेना?
जिस दिन समाजवादी पार्टी ने अफजाल अंसारी को गाजीपुर से उम्मीदवार घोषित किया उसके ठीक पहले जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल और गाजीपुर के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा का आगमन जनपद में हुआ. भले ही वो मीडिया से मुखातिब न हुए हों लेकिन जनता से अपनत्व दिखने में पीछे नहीं रहें. एक नेता की तरह वो अपने समर्थकों के बिच नज़र आएं.
राजनीति की रणनीति को समझना आम जनमानस के लिए बेहद ही मुश्किल हो चला है. विचारधारा में से विचार गयाबा है. राजनीति में से निति गायब है अब तो भईया बस इतना ही है की कोई तमाम आरोपों के बाद उसी जगह खड़े होकर गरज रहा है और कोई राज करने की धारा में विचारों का त्याग कर बहता जा रहा है. अब यदि मुकाबला अफजाल अंसारी और बृजेश सिंह के बिच होता है तो अफजाल अंसारी की हार-जीत का सीधा असर मुख्तार अंसारी के रुतबे पर पड़ेगा. दूसरी तरफ़ ब्रजेश सिंह भी पिछले तीन दशकों से अंसारी परिवार के लिए चुनौती बनकर खड़े हैं. अंसारी परिवार हो या फिर ब्रजेश सिंह दोनों पर आरोप है कि दोनों ने माफिया साम्राज्य के रास्ते सियासत की सीढ़ी चढ़ी. मुख्तार अंसारी भले ही जेल में बंद हों लेकिन, बेटा अब्बास अंसारी मऊ से विधायक है. बड़े भाई सिबगतुल्ला के बेटे मन्नू अंसारी ने कमान संभाली हुई है. अफजाल अंसारी अभी भी ग़ाज़ीपुर से सांसद हैं.