कब तक नाम बदलकर काम चलाओगे-रत्नाकर सिंह नाम बदलने से भारत रत्न,भारत में कम्प्यूटर क्रांति के जनक,पंचायती व्यवस्था के कर्णधार,देश की ख़ातिर वतन पे अपनी जान न्योछावर करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गाँधी जी की गरिमा को धूमिल कदापि नहीं किया जा सकता है ।
हम तो माँग करते हैं कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न पुरस्कार दिया जाये लेकिन मोदी जी ये नहीं करेंगे क्योंकि उनकी मंशा मेजर ध्यानचंद को सम्मान देने से ज्यादा गाँधी परिवार के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की है ज़िसने देश को ३ प्रधानमंत्री दिये है जिसमें २ देश के लिये शहीद हो गये और नेहरू जी तो देश की आज़ादी के लिये ३२५२ दिन जेल में बिताये,देश को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने में गाँधी परिवार का अभूतपूर्व योगदान रहा है जो इतिहास में अमर है।
अगर मोदी जी को देश की ख़ातिर अपना योगदान देने वाले महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि देनी होती तो वो अपने जीतेजी गुजरात में बने विश्व के सबसे बड़े सरदार पटेल स्टेडियम का नाम अपने नाम पर नहीं रखते ।*
अगर मोदी जी को खेल भावना को ऊँचा करना होता तो जो हाकी टीम आज देश के लिये मेडल ला रही है उसको उड़ीसा सरकार को स्पॉन्सर करने की ज़रूरत नहीं होती केंद्र सरकार हर सम्भव मदद के लिये तैयार रहती ।
अगर मोदी जी को खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना होता तो आज मोदी सरकार खेल बजट में कटौती नहीं करती ।१४० करोड़ की आबादी वाला हमारा देश भी शीर्ष स्थान हासिल करता ना कि ६६वाँ स्थान पे रहता।
आज देश में खेल के स्तर को सुधारने की ज़रूरत है,खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय सुविधायें देने की ज़रूरत है ना कि खेल बजट कम कर उनकी सुविधाओं को कम करने की ।
मोदी जी और योगी जी पुरस्कार और स्थान के नाम बदलने को ही असली विकास समझते हैं ।. रत्नाकर सिंह-कटरिया, ग़ाज़ीपुर
नाम बदलने से काम नही चलेगा,अपना भी काम से नाम करें-रत्नाकर सिंह
