गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र में लाठीचार्ज के दौरान दिव्यांग भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की मौत हो गई। घटना के बाद मामला तूल पकड़ गया और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि पुलिस ने न केवल भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया बल्कि दिव्यांग कार्यकर्ता के चेहरे और पीठ पर भी बेरहमी से प्रहार किया गया। उसकी पीठ पर गहरे लाठी के निशान मिले हैं।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
घटना को गंभीरता से लेते हुए एसपी डॉ. ईरज राजा ने गुरुवार देर शाम तत्काल कदम उठाए। नोनहरा थानाध्यक्ष वेंकटेश तिवारी समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि पांच अन्य को लाइन हाजिर कर दिया गया। यह कार्रवाई डीआईजी वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण के निर्देश पर हुई जांच के बाद की गई। इसके बावजूद सवाल बना हुआ है कि इतनी बर्बर कार्रवाई किसके आदेश पर हुई।
कानूनी ढांचा और पुलिस नियम
कानून के मुताबिक, किसी थाना इंचार्ज या चौकी प्रभारी को अपनी मर्जी से लाठीचार्ज करने का अधिकार नहीं है। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 129 कहती है कि अवैध जमावड़े को पहले चेतावनी दी जानी चाहिए और आदेश न मानने पर ही न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग हो सकता है। वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस रेगुलेशन की धारा 70 के अनुसार लाठीचार्ज का उद्देश्य केवल भीड़ को तितर-बितर करना है, न कि दंडात्मक हमला करना। बल प्रयोग सिर या चेहरे जैसे संवेदनशील हिस्सों पर नहीं होना चाहिए।
जनता के सवाल और आगे की जांच
दिव्यांग कार्यकर्ता की मौत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। सबका एक ही सवाल है कि जब कानून और पुलिस मैनुअल स्पष्ट नियम तय करते हैं तो आखिर इतनी बर्बरता क्यों की गई? क्या मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया था या थानाध्यक्ष ने अपनी मनमानी की? जांच अब इसी बिंदु पर केंद्रित है। यदि नियमों का उल्लंघन साबित हुआ तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी चल सकता है।
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📌 धारा 129 CrPC क्या कहती है?
- अवैध जमावड़े को पहले चेतावनी देकर हटने का आदेश दिया जाए।
- आदेश न मानने पर पुलिस न्यूनतम बल प्रयोग कर सकती है।
- बल प्रयोग का उद्देश्य सिर्फ भीड़ को तितर-बितर करना है।
यूपी पुलिस रेगुलेशन 70 की अहम बातें
- बल प्रयोग से पहले चेतावनी अनिवार्य।
- “न्यूनतम और नियंत्रित बल” का इस्तेमाल किया जाए।
- चेहरे और सिर जैसे संवेदनशील हिस्सों पर वार से बचा जाए।
- भीड़ हटते ही लाठीचार्ज तुरंत बंद करना होगा।
लाठीचार्ज कब वैध, कब अवैध?
✔ वैध – भीड़ अवैध रूप से जमा हो और शांति-भंग की आशंका हो, चेतावनी के बाद न हटे।
✘ अवैध – बिना आदेश या बिना औचित्य के बल प्रयोग, भीड़ को सबक सिखाने या दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर लाठीचार्ज।