मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर शाह ने वादा पूरा किया:पहली बार कैबिनेट फुल; सबसे ज्यादा 25 ओबीसी मंत्री

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार रविवार को पूरा हो गया। इस विस्तार में 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह विस्तार केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी चुनावों के लिए बड़ा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है।

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार के 9 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है, जब मंत्रिमंडल का पूरा कोटा भर गया है। अब सभी 60 पदों पर मंत्री नियुक्त हो चुके हैं। भाजपा इस विस्तार के जरिए पिछड़े, दलित, सवर्ण और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत कर 2027 की चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देती नजर आ रही है।

PDA फॉर्मूले की काट निकालने की कोशिश:

समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लगातार ‘PDA’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार में 3 ओबीसी और 2 दलित चेहरों को शामिल कर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या 25 हो गई है, जबकि दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर 10 पहुंच गई है। इसके अलावा ब्राह्मण मंत्रियों की संख्या भी 8 हो चुकी है। भाजपा यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि सत्ता में सभी वर्गों को बराबर भागीदारी दी जा रही है।

भूपेंद्र चौधरी को मिला भरोसे का इनाम:

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी (Bhupendra Chaudhary) को दोबारा मंत्री बनाकर पार्टी ने केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे का संकेत दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज के बड़े चेहरे माने जाने वाले भूपेंद्र चौधरी लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने पश्चिमी यूपी में अपने मजबूत जाट वोटबैंक को साधने के लिए यह फैसला लिया है। इससे पहले भी वह योगी सरकार में पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं। अब उनके मंत्री बनने के बाद जाट समाज से मंत्रियों की संख्या तीन हो गई है।

मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर बड़ा संदेश:

ऊंचाहार (Unchahar) से विधायक और समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के करीब आए मनोज पांडेय (Manoj Pandey) को मंत्री बनाना भी इस विस्तार का बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने उनसे जो वादा किया था, उसे अब पूरा किया गया है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा के खिलाफ जाकर भाजपा का समर्थन करने के बाद से ही मनोज पांडेय को संगठन में अहम भूमिका देने की तैयारी थी। उन्हें अवध (Awadh) और पूर्वांचल (Purvanchal) के बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में देखा जाता है।

ब्राह्मण और लोध समाज को साधने की रणनीति:

मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा ने ब्राह्मण समाज को भी साधने की कोशिश की है। पार्टी को उम्मीद है कि मनोज पांडेय के जरिए अवध और पूर्वांचल के ब्राह्मण मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। अब भाजपा के पास डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak), केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) और मनोज पांडेय जैसे बड़े ब्राह्मण चेहरे मौजूद हैं।

इसके अलावा लोध समाज की नाराजगी दूर करने के लिए कैलाश राजपूत (Kailash Rajput) को मंत्री बनाया गया है। भाजपा को फीडबैक मिल रहा था कि लोध समाज में प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष है। अब इस समाज से मंत्रियों की संख्या तीन हो गई है।

दलित और पासी वोटबैंक पर भी फोकस:

भाजपा ने दलित और पासी समाज को भी साधने की रणनीति अपनाई है। कृष्णा पासवान (Krishna Paswan) को मंत्री बनाकर पार्टी ने दलित, महिला और पासी समाज को एक साथ संदेश देने की कोशिश की है। वहीं वाल्मीकि समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए सुरेंद्र दिलेर (Surendra Diler) को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा दलित वर्ग के अपने पारंपरिक वोटबैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार सामाजिक संतुलन पर काम कर रही है।

वाराणसी और पूर्वांचल को भी अहमियत:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) से जुड़े नेता हंसराज विश्वकर्मा (Hansraj Vishwakarma) को मंत्री बनाकर भाजपा ने विश्वकर्मा समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया है। अब योगी मंत्रिमंडल में वाराणसी क्षेत्र से चार मंत्री हो चुके हैं।

इसी तरह पाल समाज को साधने के लिए अजीत पाल सिंह (Ajit Pal Singh) को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह हर बड़े सामाजिक समूह को सरकार में हिस्सेदारी दे रही है।

2027 चुनाव की तैयारी मानी जा रही रणनीति:

राजनीतिक विशेषज्ञ इस मंत्रिमंडल विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की अंतिम राजनीतिक फील्डिंग मान रहे हैं। पार्टी ने क्षेत्रीय, जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार किया है। भाजपा की कोशिश है कि समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले को कमजोर किया जाए और सभी वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत बनाई जाए।

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