चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन में चीन और रूस समेत 11 देश शामिल होंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के भी भारत आने की जानकारी दी गई है।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना भी जताई जा रही है। यदि यह बैठक होती है तो जून 2020 में गलवान हिंसा के बाद दोनों नेताओं के बीच भारत में होने वाली यह पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी।
गलवान घाटी में हुई झड़प के दौरान 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके बाद चीन ने भी अपने चार सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी।
डोभाल ने चीन में की थी अहम बातचीत:
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) पिछले महीने चीन गए थे। उन्होंने 24 अगस्त को चीन की यात्रा की थी। इसके अगले दिन 25 अगस्त को उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) के साथ बातचीत की थी।
इस दौरान सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा से जुड़े विषयों के साथ ही आपसी संबंधों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे हैं।
व्यापार और आर्थिक रिश्तों पर भी भारत का फोकस:
भारत और चीन के बीच बातचीत का दायरा केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
इसके अलावा भारत रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। इन क्षेत्रों में आपूर्ति से जुड़े विषय भी दोनों देशों के बीच संबंधों के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में हो रहा BRICS सम्मेलन:
इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। नई दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आर्थिक सहयोग और सप्लाई चेन पर जोर:
भारत की अध्यक्षता में BRICS के तहत ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर फोकस किया जा रहा है। इसके साथ ही आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी प्राथमिकता में हैं।
BRICS को केवल राजनीतिक मंच के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक पर भी नजर रहेगी।
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