देवरिया में कालाजार को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, लक्षण दिखते ही जांच की सलाह

देवरिया (Deoria), 10 सितंबर 2026। पथरदेवा ब्लॉक के आयुष्मान आरोग्य मंदिर सेमरी में कालाजार बीमारी को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सीफार के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफार्म के सदस्यों, सीएचओ, ग्राम प्रधान, एएनएम, संगिनी, आशा, आंगनबाड़ी और वालेंटियर को कालाजार के वाहक, बचाव, लक्षण, जांच और इलाज से जुड़ी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाना और लक्षण दिखाई देने पर समय से जांच व इलाज कराने के लिए लोगों को जानकारी देना रहा।

A group of people, including women and men, seated outdoors in a community meeting setting. The participants are gathered in a semi-circle, engaged in discussion, with a few posters visible on the wall behind them.

प्रशिक्षण में सहयोगी संस्था सीफार के जिला प्रतिनिधि नीरज ओझा ने प्रतिभागियों को कालाजार बीमारी से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कालाजार की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। बीमारी के लक्षण सामने आने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और तत्काल जांच तथा इलाज कराया जाना चाहिए।

बालू मक्खी के काटने से फैलता है कालाजार:

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कालाजार एक जानलेवा बीमारी है, जो बालू मक्खी के काटने से फैलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बालू मक्खी नमी वाली जगहों और मकानों की दरारों में पाई जाती है। ऐसे में इससे बचाव के लिए आसपास साफ-सफाई रखने और सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करने की सलाह दी गई।

प्रशिक्षण में बीमारी के वाहक और उससे बचाव के उपायों पर भी जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि जागरूकता और समय पर जांच तथा इलाज के माध्यम से कालाजार के उन्मूलन की दिशा में काम किया जा सकता है।

कालाजार के दो प्रकार और प्रमुख लक्षण बताए:

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कालाजार दो प्रकार का होता है। पहला विसलर लिसमेनियासिस (VL) है। इसके प्रमुख लक्षणों में 15 दिन से अधिक समय तक बुखार रहना, भूख न लगना, खून की कमी, वजन घटना और रंग काला होना शामिल हैं।

दूसरा पोस्ट कालाजार डरमल लिसमेनियासिस (PKDL) है। इसमें त्वचा पर सफेद धब्बे दिखाई देना प्रमुख लक्षण बताया गया। प्रशिक्षण में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ऐसे लक्षण वाले लोगों की पहचान होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल में जांच और इलाज कराने की जानकारी दी गई।

जांच और इलाज की सुविधा निशुल्क:

नीरज ओझा ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि कालाजार की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है और यह सुविधा निशुल्क है। उन्होंने कहा कि बीमारी के लक्षण मिलने पर किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय पर जांच और इलाज कराने के लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है।

प्रशिक्षण में मौजूद स्वास्थ्य और समुदाय से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी इस संबंध में अपनी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई, ताकि लक्षण वाले लोगों को समय से जांच और इलाज के लिए सरकारी अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

बालू मक्खी से बचाव के लिए आईआरएस छिड़काव:

बीसीपीएम आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि कालाजार की वाहक बालू मक्खी से बचाव के लिए वर्ष में दो बार आईआरएस का छिड़काव कराया जाता है। यह छिड़काव घर के अंदरूनी हिस्सों में किया जाता है। उन्होंने बताया कि मानसून से पहले मार्च-अप्रैल और मानसून के बाद अक्टूबर-नवंबर में आईआरएस छिड़काव कराया जाता है।

उन्होंने बताया कि इस छिड़काव का उद्देश्य बालू मक्खी को समाप्त करना है। प्रशिक्षण के दौरान बीमारी से बचाव के लिए स्वच्छता और आवश्यक सावधानियों पर भी जोर दिया गया।

प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मी और ग्रामीण प्रतिनिधि रहे मौजूद:

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीपीएम नागेंद्र मल्ल, सीएचओ अनुराधा सिंह, एएनएम प्रीति सहित ग्राम प्रधान, आशा, आंगनबाड़ी और वालेंटियर मौजूद रहे। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को कालाजार की पहचान, बचाव, जांच और इलाज से संबंधित जानकारी दी गई।

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रिपोर्टर: गुड़िया मद्धेशिया

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