उत्तर प्रदेश का महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेस-वे अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री Narendra Modi (नरेंद्र मोदी) द्वारा इसका उद्घाटन किया जाएगा। यह परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी बल्कि राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।
प्रोजेक्ट की शुरुआत और निर्माण प्रक्रिया:
इस मेगा प्रोजेक्ट की नींव वर्ष 2018 में रखी गई थी, जब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) की सरकार ने मेरठ से प्रयागराज तक एक्सप्रेस-वे बनाने की घोषणा की। इसके बाद 2019 में DPR तैयार कर 12 जिलों का रूट तय किया गया। वर्ष 2020 में EPC मॉडल पर टेंडर जारी कर निर्माण कार्य को चार पैकेज में विभाजित किया गया। 2021 में Shahjahanpur (शाहजहांपुर) में प्रधानमंत्री Narendra Modi (नरेंद्र मोदी) ने इसका शिलान्यास किया, जिसके बाद निर्माण कार्य ने गति पकड़ी।
जमीन अधिग्रहण और संरचना विकास:
2022 में इस परियोजना के लिए लगभग 7453 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया। इसमें 12 जिलों के करीब 83 हजार किसानों को लगभग 9500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। 2023 तक लगभग 40 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका था, जिसमें 17 इंटरचेंज, 14 बड़े पुल और 126 छोटे पुल शामिल थे। 2024 में 7 रेलवे ओवरब्रिज, 375 अंडरपास और 2 मुख्य टोल प्लाजा बनाए गए। 2025 में सड़क की लेयरिंग, साइनज और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे किए गए और 2026 में यह एक्सप्रेस-वे पूरी तरह तैयार हो गया।
यात्रा समय और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव:
गंगा एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा का समय 11 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा। इससे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क मजबूत होगा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
मेरठ में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा:
मेरठ पहले से ही एक प्रमुख औद्योगिक शहर है, जहां खेल सामग्री, रेडीमेड वस्त्र और चमड़े के उत्पाद बनाए जाते हैं। अब एक्सप्रेस-वे के जरिए यहां के उत्पाद Bulandshahr (बुलंदशहर), Lucknow (लखनऊ) और Prayagraj (प्रयागराज) तक आसानी से पहुंचेंगे। इससे मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही जमीन की कीमतों में भी तेजी से इजाफा हुआ है।
हापुड़ में लॉजिस्टिक हब का विकास:
Hapur (हापुड़) जिले में एक्सप्रेस-वे के किनारे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर विकसित किया जाएगा। इससे व्यापार और परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और उद्योगों को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
बुलंदशहर में रोजगार के नए अवसर:
Bulandshahr (बुलंदशहर) में एक्सप्रेस-वे के किनारे 120 हेक्टेयर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार मिलेगा और उन्हें अन्य शहरों में पलायन नहीं करना पड़ेगा।
अमरोहा और संभल में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा:
Amroha (अमरोहा) के गन्ना किसानों को तेज परिवहन सुविधा मिलेगी, जिससे उनके उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचेंगे। वहीं Sambhal (संभल) में धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापारियों को नए बाजार मिलेंगे।
बदायूं और शाहजहांपुर में औद्योगिक विस्तार:
Badaun (बदायूं) में एक्सप्रेस-वे के किनारे कई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हो रही है, जिससे क्षेत्र का शहरीकरण तेजी से बढ़ेगा। Shahjahanpur (शाहजहांपुर) में बनी हवाई पट्टी भविष्य में डिफेंस और कार्गो सुविधाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यहां के गन्ना किसानों को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
हरदोई और उन्नाव में रियल एस्टेट और उद्योग का विकास:
Hardoi (हरदोई) में जमीन की कीमतों में वृद्धि हुई है और नए व्यावसायिक केंद्र विकसित हो रहे हैं। वहीं Unnao (उन्नाव) में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनने से उद्योगों की संख्या बढ़ेगी और रोजगार के अवसर दोगुने होंगे।
रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को मिलेगा फायदा:
Raebareli (रायबरेली) में स्थित AIIMS (एम्स) तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे आसपास के जिलों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। Pratapgarh (प्रतापगढ़) के आंवला और आम उत्पाद अब बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे। Prayagraj (प्रयागराज) में धार्मिक आयोजनों के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा और नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास होगा।
आर्थिक और सामाजिक बदलाव की दिशा:
गंगा एक्सप्रेस-वे के जरिए 12 जिलों में उद्योग, कृषि, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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