झांसी (Jhansi) में केंद्र सरकार के सुशासन और विकास के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विकसित भारत संकल्प सम्मेलन, विकास प्रदर्शनी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार (Pandit Deendayal Upadhyay Auditorium) में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya), सांसद अनुराग शर्मा (Anurag Sharma), जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, किसानों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्राकृतिक खेती के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

बुंदेलखंड के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया:
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड (Bundelkhand) का विकास प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है। हर घर तक जल पहुंचाने की तरह हर खेत तक पानी पहुंचाना भी सरकार का महत्वपूर्ण संकल्प है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास की जो झलक दिखाई दे रही है, वह आने वाले बड़े बदलावों का संकेत है।
विकास प्रदर्शनी और विभागीय योजनाओं का अवलोकन:
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और विकास प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ हुई। इस दौरान विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया गया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं, उपलब्धियों और लाभार्थी आधारित कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की।

प्रदर्शनी के माध्यम से सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और उनके प्रभाव को लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया। इससे उपस्थित लोगों को विकास कार्यों और सरकारी प्रयासों की विस्तृत जानकारी मिली।
प्राकृतिक खेती को बताया समय की आवश्यकता:
उप मुख्यमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होगी और भूमि की उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए प्राकृतिक खेती अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने किसानों को कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र में दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।
किसानों को दी गई आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी:
प्राकृतिक खेती कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग, फसल विविधीकरण तथा जैविक संसाधनों के उपयोग पर चर्चा की गई।
विशेष तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra) के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अतीक अहमद (Dr. Atiq Ahmad) ने किसानों को सब्जियों की उन्नत खेती, खरीफ सीजन की तैयारी, नर्सरी प्रबंधन, जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त प्रजातियों के चयन तथा जैविक कीट नियंत्रण की तकनीकों से अवगत कराया।
सफल किसानों ने साझा किए प्रेरक अनुभव:
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों और स्वयं सहायता समूहों ने अपने अनुभव साझा किए। चिरगांव (Chirgaon) क्षेत्र के किसान अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि प्राकृतिक खेती और गौ आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने उत्पादन लागत कम की और आय में वृद्धि हासिल की।
उन्होंने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और जैविक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
जनकल्याणकारी योजनाओं की दी जानकारी:
सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने विकसित भारत के निर्माण, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और सरकार की जनहितकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
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