Varanasi: राजातालाब तहसील में एक फरियादी ने शुक्रवार को खुद को आग लगा लिया। घटना से परिसर में हड़कंप मच गया। आनन- फानन गंभीर रूप से झुलसे पीड़ित को इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। यहां शनिवार की सुबह उपचार के दाैरान उनकी माैत हो गई।
राजातालाब तहसील परिसर स्थित नर्मदेश्वर शिवमंदिर में शुक्रवार की दोपहर करीब ढाई बजे साधु वशिष्ठ नारायण गोंड (58) ने कमंडल से पेट्रोल उड़ेल कर आत्मदाह कर ली। धुआं देखकर अधिवक्ता दौड़े और कपड़े से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक साधु 50 फीसदी से ज्यादा जल चुका था। शनिवार की सुबह उसकी माैत हो गई।
उसे बीएचयू के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया था। उसने कहा था कि वह पिछले पांच साल से बंजर जमीन के पट्टे के लिए दौड़ रहा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खुद को आग के हवाले करने से पहले गेरुआ वस्त्र पहने वशिष्ठ ने आधे घंटे तक मंदिर में पूजा की थी। खुद को अनुसूचित जनजाति का बताकर न्याय की मांग कर रहा था।
ये है पूरा मामला
वशिष्ठ नारायण गोंड पत्नी और दो बेटों के साथ मिर्जामुराद के जोगापुर भोरकला गांव में आश्रम बनाकर रहते थे। वहीं छोटा मंदिर भी बना रखा है। एक मड़ई में गो पालन भी करते थे। उनके पास 15 गाय हैं। दूध बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। वह शुक्रवार को दूसरे दिन राजातालाब तहसील परिसर में पहुंचे। पहले मंदिर में पूजा की, फिर कमंडल उठाकर करीब एक लीटर पेट्रोल अपने शरीर पर उड़ेल लिया और माचिस से आग लगा ली।
आसपास के चैंबर में बैठे अधिवक्ता दौड़े और आग बुझाने लगे। आत्मदाह के प्रयास की जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार शालिनी सिंह भी मौके पर पहुंचीं और एम्बुलेंस के जरिए साधु को बीएचयू भिजवाया था। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने कहा था कि वशिष्ठ नारायण का इलाज बीएचयू अस्पताल में चल रहा है। वह गंभीर रूप से झुलसे हैं।
आवेदन पर लगाई जा रही थी गलत रिपोर्ट
वशिष्ठ नारायण के अधिवक्ता जगदीश ने बताया कि अनुसूचित जनजाति का होने के कारण वह पट्टा देने का अनुरोध कर रहे हैं। लेखपाल और ग्राम प्रधान की कार्यप्रणाली से नाराज थे। पट्टे से संबंधित आवेदन पर गलत रिपोर्ट लगाई जा रही थी। तहसीलदार से भी भूमि आवंटन की मांग की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
खोजी जा रही हैं फाइलें
लेखपाल आकांक्षा जायसवाल ने कहा कि वशिष्ठ नारायण का मुकदमा पुराना था। तब वह इस गांव की लेखपाल नहीं थीं। छह महीने पहले जॉइन किया है। तहसीलदार शालिनी सिंह ने बताया कि इस समय साधु का कोई मुकदमा नहीं चल रहा था। फाइलें खोजी जा रही हैं। एसडीएम राजातालाब शांतनु कुमार ने बताया कि तहसील पहुंचकर फाइल की जांच कर पूरा विवरण जुटाया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी। बीएचयू के बर्न यूनिट में उनका इलाज कराया जा रहा है।
वशिष्ठ नारायण ने सरकारी जमीन पर किया था अतिक्रमण
वशिष्ठ नारायण का मामला सामने आने के बाद तहसील प्रशासन ने बयान जारी किया है। एसडीएम ने बताया कि वशिष्ठ ने ग्राम जोगापुर की नवीन परती भूमि पर अतिक्रमण किया था। इस भूमि पर पानी की टंकी बनाई जानी थी इसलिए मामला खुलकर सामने आया। अतिक्रमण हटवाने का मुकदमा तहसील कोर्ट में चला और अतिक्रमण का मामला सही पाया गया। अपर जिलाधिकारी कोर्ट ने भी वशिष्ठ की अपील खारिज कर दी थी। वशिष्ठ नारायण के तीन बेटे हैं। एक का मकान जागापुर में है।
अधिवक्ता ने कहा- मुकदमा हो गया था खारिज
अधिवक्ता जगदीश ने आरोप लगाया कि वशिष्ठ ने एक जमीन का मुकदमा भी दर्ज किया था जिस पर बेदखली का आदेश जारी कर दिया था। इसपर जिलाधिकारी से अपील की गई थी। कुछ महीने पहले वहां से भी मुकदमा खारिज हो गया था।