अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारी तेज: स्विट्जरलैंड में परमाणु समझौते पर हो सकती है बातचीत, स्टीव विटकॉफ रवाना

अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच हालिया शांति समझौते के बाद दोनों देशों के बीच आगे की शर्तों और अंतिम समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्विट्जरलैंड (Switzerland) रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि इजराइल (Israel) और हिजबुल्लाह (Hezbollah) के बीच संघर्ष के कारण रुकी बातचीत अब फिर से शुरू हो सकती है।

स्विट्जरलैंड में फिर शुरू हो सकती है वार्ता:

सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन (Washington) और तेहरान (Tehran) के बीच संवाद बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। हाल ही में हुए युद्धविराम के बाद क्षेत्रीय हालात अपेक्षाकृत शांत हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं बढ़ी हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के दामाद जेरेड कुशनर (Jared Kushner) की भूमिका भी सामने आ सकती है।

समझौते के तहत दोनों देशों को अंतिम सहमति तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की समय-सीमा दी गई है। वहीं एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) भी स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वार्ता टलने के पीछे क्षेत्रीय तनाव:

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित औपचारिक वार्ता निर्धारित समय पर नहीं हो सकी। बताया गया कि लेबनान (Lebanon) में जारी इजराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। हालांकि अमेरिकी पक्ष की ओर से संकेत दिए गए हैं कि बातचीत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आगे के प्रयास जारी हैं।

लेबनान में हमलों से बढ़ी चिंता:

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी क्षेत्र में हुए इजराइली हवाई हमलों में कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इन घटनाओं के बाद क्षेत्रीय स्थिरता और शांति प्रयासों को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। युद्धविराम की घोषणा के बावजूद कुछ क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों की खबरें आती रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी जहाजों की आवाजाही:

अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के दिनों में यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में जहाज और नाविक अब भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

ब्रिटेन (Britain) के समुद्री निगरानी केंद्र यूकेएमटीओ (UKMTO) ने अपनी ताजा सलाह में क्षेत्र में खतरे का स्तर मध्यम बनाए रखा है। साथ ही जहाजों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

ट्रम्प का बयान और जनमत सर्वेक्षण:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए मजबूरी में नहीं आया, बल्कि ईरान ने वार्ता की पहल की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले 60 दिनों तक ईरान को अमेरिका की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी।

इस बीच ट्रम्प ने एक जनमत सर्वेक्षण भी साझा किया, जिसमें अमेरिका-ईरान प्रारंभिक समझौते पर लोगों की राय ली गई। सर्वेक्षण के अनुसार बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने समझौते का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने तटस्थ या विरोधी रुख भी व्यक्त किया।

ईरान ने रखीं आगे की शर्तें:

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmail Baghaei) ने कहा है कि अंतिम समझौते पर औपचारिक बातचीत तभी शुरू होगी जब समझौता ज्ञापन में शामिल कुछ प्रमुख प्रावधानों को लागू किया जाएगा। इनमें युद्ध की समाप्ति, प्रतिबंधों में राहत, सुरक्षित समुद्री आवाजाही और अन्य शर्तें शामिल हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि मध्यस्थ देशों के जरिए संपर्क और परामर्श की प्रक्रिया जारी है।

कतर और अन्य देशों की मध्यस्थता पर नजर:

कतर (Qatar) लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बनाए रखने वाले प्रमुख मध्यस्थ देशों में शामिल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल थानी (Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani) भी स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय शांति और आगे की वार्ता में मध्यस्थ देशों की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।

क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर असर:

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आगामी दिनों में होने वाली संभावित वार्ताएं यह तय करेंगी कि दोनों देश अंतिम समझौते की दिशा में कितनी प्रगति कर पाते हैं। साथ ही मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिरता, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

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