क्या थम जाएगी जंग: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता 14 शर्तों के समझौते के करीब, होर्मुज खुलेगा या फिर बढ़ेगा संकट?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब युद्ध समाप्त होने और परमाणु बातचीत शुरू होने की संभावना तेज होती दिखाई दे रही है। अमेरिकी वेबसाइट Axios (एक्सियोस) की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर सहमति बनने की दिशा में तेजी से बातचीत चल रही है और ईरान अगले 48 घंटे के भीतर प्रस्ताव पर सहमति दे सकता है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच 14 बिंदुओं वाला एक समझौता ज्ञापन तैयार किया गया है, हालांकि इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
14 बिंदुओं वाले समझौते पर चर्चा तेज:
रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित समझौते में सबसे पहले युद्ध समाप्त करने की घोषणा की जाएगी। इसके बाद दोनों देशों के बीच करीब 30 दिनों तक विस्तृत बातचीत होगी। इस दौरान Hormuz Strait (होर्मुज जलडमरूमध्य), ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बातचीत के लिए Islamabad (इस्लामाबाद) और Geneva (जिनेवा) जैसे शहरों के नामों पर विचार किया जा रहा है।
ड्राफ्ट के अनुसार ईरान कुछ समय के लिए अपने Nuclear Program (परमाणु कार्यक्रम) को रोक सकता है। इसके बदले अमेरिका चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में राहत देगा और ईरान की जब्त की गई अरबों डॉलर की राशि जारी कर सकता है। इसके अलावा Hormuz Strait (होर्मुज जलडमरूमध्य) में दोनों देशों द्वारा लगाई गई पाबंदियों में भी नरमी लाने पर सहमति बनने की संभावना जताई गई है।
परमाणु कार्यक्रम रोकने की अवधि पर मतभेद:
समझौते में सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की अवधि को लेकर बना हुआ है। जानकारी के अनुसार ईरान ने पांच साल का प्रस्ताव दिया था, जबकि अमेरिका करीब 20 साल की अवधि चाहता था। अब दोनों पक्ष 12 से 15 वर्षों के बीच किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
पिछले 24 घंटे में सामने आए बड़े घटनाक्रम:
अमेरिका ने Hormuz Strait (होर्मुज जलडमरूमध्य) में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए United Nations Security Council-UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) में नया प्रस्ताव पेश किया है। इसमें ईरान से समुद्री हमले, माइंस बिछाने और टोल वसूली तुरंत रोकने की मांग की गई है।
इसी बीच ईरान ने लगातार दूसरे दिन UAE (संयुक्त अरब अमीरात) पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हालांकि UAE ने दावा किया कि उसके डिफेंस सिस्टम ने मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।
अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत USS George H.W. Bush (यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश) वॉरशिप को Hormuz Strait (होर्मुज जलडमरूमध्य) भेजा है। इसका उद्देश्य वहां फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना बताया गया है।
Fujairah (फुजैराह) हमले में भारतीय नागरिकों के घायल होने पर भारत ने नाराजगी जताई है। भारत ने सभी पक्षों से हिंसा तुरंत रोकने और आम नागरिकों व नागरिक ढांचे को निशाना न बनाने की अपील की है।
वहीं China (चीन) ने अपनी घरेलू कंपनियों को विदेशी प्रतिबंधों से बचाने के लिए नया कानून लागू किया है। दरअसल अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
Trump ने कहा- हालात नियंत्रण में हैं:
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump (डोनाल्ड ट्रम्प) ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना की तारीफ करते हुए कहा कि उसने मजबूत नाकेबंदी कायम की है और ईरानी जहाजों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई गई है।
ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर होने का दावा:
Donald Trump (डोनाल्ड ट्रम्प) ने यह भी दावा किया कि हालिया सैन्य अभियानों के बाद ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है। उनके अनुसार ईरान की नौसेना, वायुसेना, एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम, रडार और मिसाइल क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि इन दावों पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
समझौते की संभावना अभी बरकरार:
व्हाइट House (व्हाइट हाउस) में आयोजित UFC Freedom 250 कार्यक्रम से जुड़े आयोजन के दौरान Donald Trump (डोनाल्ड ट्रम्प) ने कहा कि पिछले 44 घंटों में दोनों देशों के बीच अच्छी बातचीत हुई है और समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि समझौता होता है तो ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे और कूटनीतिक समाधान का रास्ता खुल सकता है।
UAE और इजराइल के नेताओं के बीच बातचीत:
UAE (संयुक्त अरब अमीरात) के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan (मोहम्मद बिन जायद अल नहयान) और Israel (इजराइल) के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu (बेंजामिन नेतन्याहू) के बीच फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने हाल में UAE पर हुए हमलों की निंदा की और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। Israel (इजराइल) ने इन हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए UAE के सुरक्षा संबंधी कदमों का समर्थन करने की बात कही।
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