यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव का ऐलान:MLC की 11 सीटों पर भी तारीख घोषित; सपा-भाजपा की गणित समझिए
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों और शिक्षक-स्नातक विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) की 11 सीटों के चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा और इसी दिन मतगणना के बाद नतीजे भी घोषित किए जाएंगे। वहीं, शिक्षक और स्नातक एमएलसी की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।
राज्यसभा की 10 सीटों पर बदलेंगे समीकरण:
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों में फिलहाल आठ सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP), एक सीट समाजवादी पार्टी (SP) और एक सीट बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पास है। इन सभी सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। अभी तक किसी भी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं।
वहीं, विधान परिषद की 11 सीटों में आठ सीटें भाजपा और तीन सीटें सपा के पास हैं। सपा ने सभी 11 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, जबकि भाजपा और कांग्रेस ने पांच-पांच सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं।
एमएलसी चुनाव की तैयारी में भाजपा:
भाजपा प्रवक्ता समीर सिंह ने कहा कि पार्टी शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव की तैयारी पहले से कर रही है। उनके मुताबिक ब्लॉक स्तर पर मतदान केंद्र और संयोजक बनाए गए हैं। पार्टी की ओर से मतदाता तैयार किए गए हैं और चुनाव की घोषणा का इंतजार किया जा रहा था। अब चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद भाजपा पूरी तरह चुनावी तैयारी में जुटेगी।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी:
समीर सिंह ने कहा कि राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद पार्टी उम्मीदवारों के नाम पर विचार करेगी। केंद्रीय नेतृत्व जिन नामों को तय करेगा, उनके नामांकन की प्रक्रिया पूरी कराकर चुनाव जीतने की कोशिश की जाएगी।
उन्होंने बसपा की विधानसभा में मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के पास नामांकन भरने लायक विधायक नहीं हैं। उनके अनुसार 2020 के चुनाव में एक सीट पर भाजपा ने पर्दे के पीछे से बसपा का सहयोग किया था। समीर सिंह ने कहा कि मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा अपने दम पर सीटें जीतने में सक्षम होगी।
भाजपा में पुराने चेहरों और नए नामों पर चर्चा:
राज्यसभा की खाली होने वाली सीटों को लेकर भाजपा में कई मौजूदा सदस्यों के दोबारा भेजे जाने और कुछ नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है। डॉ. दिनेश शर्मा को 5 सितंबर को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद उनके इस्तीफे से उनकी जगह नया चेहरा आने की संभावना बताई जा रही है।
हरदीप सिंह पुरी के मामले में सितंबर-अक्टूबर में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को अहम माना जा रहा है। यदि उन्हें मंत्रिमंडल में रखा जाता है तो लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की संभावना होगी, जबकि मंत्री पद से हटने की स्थिति में किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है।
अरुण सिंह को 2020 में भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव होने के कारण राज्यसभा भेजा गया था। पार्टी के भीतर उनके दोबारा मौका पाने को लेकर भी चर्चा है। वहीं, केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी में उन्हें लोधी समुदाय के प्रमुख चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
दलित और पिछड़े वर्ग के चेहरों पर भी नजर:
उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सदस्य ब्रजलाल को भाजपा ने अनुसूचित जाति कोटे से राज्यसभा भेजा था। उनकी उम्र 71 वर्ष होने के कारण पार्टी में उनकी जगह किसी नए दलित चेहरे को मौका देने की चर्चा बताई गई है।
राज्यसभा सदस्य गीता शाक्य भाजपा की प्रदेश महामंत्री भी हैं। शाक्य समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के लिए उन्हें मौका मिला था। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थन के कारण उनके दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा है।
सीमा द्विवेदी को लेकर भी पार्टी के भीतर अलग-अलग राय बताई गई है। एक वर्ग उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने के पक्ष में है, जबकि दूसरे वर्ग का मानना है कि किसी अन्य पिछड़े वर्ग या ब्राह्मण महिला को मौका दिया जा सकता है।
नीरज शेखर के नाम पर भी नजर:
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर 2019 में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने 2020 में उन्हें राज्यसभा भेजा था। 2024 में उन्हें बलिया से लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया, लेकिन वह चुनाव हार गए। अब उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
सपा और बसपा के संभावित उम्मीदवार:
सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के दोबारा राज्यसभा जाने की संभावना बताई गई है। पार्टी के निर्णय लेने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल होने के कारण उन्हें टिकट मिलने की बात कही गई है।
बसपा की ओर से राज्यसभा में पार्टी के इकलौते सांसद रामजीलाल गौतम के दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। वह बसपा प्रमुख मायावती के करीबी नेताओं में शामिल बताए जाते हैं। 2020 में भी वह भाजपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। ऐसे में इस चुनाव में भाजपा और बसपा के बीच सहमति बनने की स्थिति में उन्हें दोबारा राज्यसभा पहुंचने का मौका मिल सकता है।
राज्यसभा चुनाव का गणित समझें:
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 31 सीटें हैं। राज्यसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा विधानसभा में पार्टियों के विधायकों की संख्या के आधार पर होता है। एक सीट जीतने के लिए आवश्यक वोट निकालने का फॉर्मूला कुल विधायकों की संख्या को खाली सीटों में एक जोड़कर भाग देने और उसमें एक जोड़ने का है।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 397 विधायक हैं और राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो रही हैं। इसके आधार पर गणित 397 ÷ (10+1) + 1 के अनुसार निकाला जाता है, जिससे एक सीट के लिए करीब 37.09 वोट का आंकड़ा सामने आता है।
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