उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। राजधानी लखनऊ (Lucknow) समेत वाराणसी (Varanasi) और कानपुर (Kanpur) में शुक्रवार को लंबे समय तक बिजली कटौती से परेशान लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन किया और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लगातार बढ़ती गर्मी और बिजली संकट ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।
लखनऊ में आधी रात को लोग घरों से बाहर निकल आए और बिजली विभाग के खिलाफ विरोध जताया। नाराज लोगों ने जेई की गाड़ी का टायर तक पंक्चर कर दिया। वहीं वाराणसी में बिजली कटौती से परेशान एक युवक बिस्तर लेकर सीधे पावर हाउस पहुंच गया और वहीं सोने की जिद पर अड़ गया। दूसरी तरफ कानपुर में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेताओं ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन करते हुए ‘स्वर्गीय बिजली व्यवस्था’ लिखे पोस्टर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी और मोमबत्तियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।
लखनऊ में आधी रात सड़कों पर उतरे लोग:
राजधानी लखनऊ (Lucknow) में बिजली कटौती को लेकर लोगों का गुस्सा देर रात देखने को मिला। कई मोहल्लों में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचे जेई की गाड़ी का टायर भी पंक्चर कर दिया। भीषण गर्मी और उमस के कारण लोगों का कहना था कि घंटों बिजली न आने से घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
वाराणसी में युवक पहुंचा पावर हाउस:
वाराणसी (Varanasi) में बिजली कटौती का विरोध अलग अंदाज में देखने को मिला। यहां एक युवक बिस्तर लेकर सीधे पावर हाउस पहुंच गया। युवक का कहना था कि जब घर में बिजली नहीं है तो वह पावर हाउस में ही सोएगा।
इस घटना को देखने के लिए आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। युवक ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार कटौती से आम लोग परेशान हैं और विभाग कोई स्थायी समाधान नहीं कर पा रहा है।
कानपुर में सपा नेताओं का प्रदर्शन:
कानपुर (Kanpur) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेताओं ने बिजली संकट को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने ‘स्वर्गीय बिजली व्यवस्था’ लिखे पोस्टर पर फूल चढ़ाए और मोमबत्तियां जलाकर सांकेतिक श्रद्धांजलि दी।
सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और आम जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। प्रदर्शन के दौरान बिजली विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
अखिलेश यादव और ए के शर्मा में बयानबाजी:
बिजली संकट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए बिजली संकट के लिए भाजपा सरकार, बिजली मंत्री और भ्रष्ट ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि जनता को अपना गुस्सा कनिष्ठ कर्मचारियों और लाइनमैन पर नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि संविदा कर्मचारियों की छंटनी के बाद वे पहले से ही दबाव में काम कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने इसे ‘महा विद्युत आपदा’ बताया।
इसके जवाब में ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा (AK Sharma) ने भी पलटवार किया। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि “जब भी आईना उठाइए, पहले खुद देखिए फिर दिखाइए।” इसके साथ ही उन्होंने ‘X’ पर 19 बिंदुओं में जवाब देते हुए पूर्ववर्ती सरकार के समय की बिजली व्यवस्था और कटौती का भी जिक्र किया।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची बिजली की मांग:
भीषण गर्मी के कारण प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में बिजली की डिमांड 30 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुकी है।
‘विद्युत प्रवाह’ वेबसाइट के मुताबिक सुबह के समय बिजली की मांग लगभग 28,692 मेगावाट दर्ज की गई, जो पिछले दिन के आंकड़ों के करीब रही। मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने बिजली एक्सचेंज से करीब 577 मेगावाट बिजली खरीदी, लेकिन इसके बावजूद पीक समय में बिजली की कमी बनी रही।
इंफ्रास्ट्रक्चर बना बड़ी चुनौती:
जानकारों का कहना है कि सरकार अतिरिक्त बिजली खरीद तो रही है, लेकिन उसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त ट्रांसमिशन क्षमता नहीं है। पावर ट्रांसमिशन क्षमता लगभग 31,500 मेगावाट बताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि पूरी क्षमता से सप्लाई दी गई तो कई उपकेंद्र ट्रिप कर सकते हैं। यही वजह है कि बढ़ती मांग के बावजूद बिजली आपूर्ति में दिक्कतें सामने आ रही हैं।
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