लखनऊ (Lucknow): उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों को तेज करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने मंत्रियों की वित्तीय शक्तियों में इजाफा करते हुए उन्हें अब 50 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने का अधिकार दे दिया है। इससे पहले यह सीमा सिर्फ 10 करोड़ रुपये तक थी। इस फैसले का उद्देश्य विकास कार्यों की गति को तेज करना और निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाना बताया गया है।
नई व्यवस्था के तहत 50 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी वित्त मंत्री देंगे, जबकि 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर पर होगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर मानदेय:
सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी अहम फैसला लिया है। अब उनका मानदेय हर महीने एक तय तारीख पर सीधे खाते में पहुंचेगा। इसके लिए राज्य सरकार केंद्र से मिलने वाले अंश का इंतजार नहीं करेगी। भुगतान में यदि केंद्र से देरी होती है, तो राज्य सरकार अपने बजट से राशि जारी करेगी। इससे लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर वेतन मिलने की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
वित्त विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वित्त विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार को और तेज करना और वित्तीय अनुशासन को मजबूत बनाना रहा। इस दौरान कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए।
वार्षिक कार्ययोजना पर सख्त निर्देश:
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को साफ अल्टीमेटम देते हुए कहा कि किसी भी हालत में वार्षिक कार्ययोजना की मंजूरी 15 अप्रैल तक लेनी होगी। देरी करने वाले विभागों की रिपोर्ट सीधे सीएम कार्यालय भेजी जाएगी। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि यदि किसी प्रोजेक्ट की लागत 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ती है, तो उसके कारण स्पष्ट करते हुए दोबारा मंजूरी लेनी अनिवार्य होगी।
सरकारी भवनों के लिए मेंटेनेंस सिस्टम:
बैठक में यह भी तय किया गया कि सड़कों की तरह अब नए सरकारी भवनों के निर्माण में भी पांच साल की मेंटेनेंस व्यवस्था अनिवार्य होगी। यह शर्त निर्माण से जुड़े ठेकों में शामिल की जाएगी। पुराने सरकारी भवनों के रखरखाव के लिए अलग से एक कॉर्पस फंड बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
पूंजीगत खर्च में देश में अग्रणी यूपी:
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश ने 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत खर्च किया है, जो देश में सबसे ज्यादा है। राज्य ने जितना कर्ज लिया, उससे अधिक राशि विकास कार्यों पर खर्च की। कुल बजट का 9.39 प्रतिशत हिस्सा निवेश पर खर्च किया गया।
नीति आयोग (NITI Aayog) के फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में उत्तर प्रदेश का स्कोर 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है, जिससे राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। वहीं आरबीआई (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार टैक्स रेवेन्यू के मामले में उत्तर प्रदेश 11.6 प्रतिशत के साथ देश में दूसरे नंबर पर है।
निर्माण कार्यों में थर्ड पार्टी ऑडिट:
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने थर्ड पार्टी ऑडिट को अनिवार्य करने का फैसला लिया है। इसके लिए आईआईटी (IIT) और एनआईटी (NIT) जैसे संस्थानों से ऑडिट कराया जाएगा। वित्त विभाग में ऑनलाइन बजट मॉड्यूल, साइबर ट्रेजरी, पेपरलेस बिल और डिजिलॉकर पर जीपीएफ स्लिप जैसी सुविधाएं पहले ही लागू हो चुकी हैं। अप्रैल 2026 तक प्रदेश का कोषागार पूरी तरह पेपरलेस करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री का बयान:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अब लक्ष्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से प्रदेश को देश का सबसे मजबूत वित्तीय प्रशासन वाला राज्य बनाना है। प्रक्रियाओं को तेज, सरल और पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।
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यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म खेलो इंडिया नॉर्थ जोन किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में शाह फैज पब्लिक स्कूल गाज़ीपुर की दो बेटियों ने पंचम लहरायाया अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
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