वैश्विक व्यापार पर अमेरिका के उच्च टैरिफ का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत से कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लागू किया है। इसका प्रभाव कपड़ा, चमड़ा, खिलौने, गहने और ऑटो पार्ट्स समेत कई श्रम-प्रधान क्षेत्रों में पड़ा है। भारत सरकार ने इस असर को कम करने के लिए ब्रिटेन (United Kingdom), यूरोपीय संघ (European Union) समेत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) पर विचार किया है।
1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम रणनीतिक मोड़ साबित होने वाला है। बजट में अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने और निर्यात आधारित क्षेत्रों को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा सकता है।
टैरिफ का तात्कालिक और दीर्घकालिक असर:
ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत से अमेरिका (United States of America) को निर्यात में 1.83 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह गिरावट भारत की पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की योजना में बाधा डाल सकती है। इसके अलावा, अमेरिका अपने कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजारों को खोलने की मांग कर रहा है।
निर्यातकों के लिए वित्तीय राहत:
केंद्रीय बजट में निर्यातकों को वित्तीय सुरक्षा देने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत निर्यातकों को ऋण और ब्याज में छूट दी जा सकती है। छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को 85 प्रतिशत तक ऋण गारंटी दी जा सकती है। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ‘भारतट्रेडनेट’ (BharatTradeNet) के माध्यम से नौकरशाही बाधाओं को कम किया जा सकता है।

रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक कदम:
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा समझौते के लिए बजट में पूंजी आवंटन हो सकता है। इसमें GE F414 इंजन और MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन के सौदे शामिल हैं। इसके साथ ही भारत में अमेरिकी उपकरणों के रखरखाव (MRO Hub) के लिए संसाधन आवंटित किए जाने की संभावना है। इससे घरेलू तकनीकी नौकरियों का सृजन होगा और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों की राय:
अर्न्स्ट एंड यंग (Ernst & Young) के डॉ. डी.के. श्रीवास्तव के अनुसार भारत को निर्यात गंतव्यों में विविधता लानी चाहिए और लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ानी चाहिए। ग्रांट थॉर्न्टन (Grant Thornton India) के ऋषि शाह ने बजट में व्यापार लागत कम करने और विनियामक स्पष्टता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। पीडब्ल्यूसी इंडिया (PwC India) के रनेन बनर्जी ने MSME क्षेत्र में क्रेडिट गारंटी और बुनियादी ढांचे के निवेश बढ़ाने की सिफारिश की।
रणनीतिक स्वायत्तता और भविष्य की तैयारी:
बद्री नारायण गोपालकृष्णन (Badri Narayan Gopalakrishnan) के अनुसार भारत अपने ईवी (EV) और एआई (AI) आधारित उद्योगों के लिए बजट में प्रावधान कर सकता है। इसमें सेमीकंडक्टर और बैटरी उत्पादन के लिए क्रिटिकल मिनरल्स मिशन शामिल हो सकता है। इसके अलावा, भारत दक्षिण-पूर्व एशिया (South-East Asia) और अफ्रीका (Africa) के नए बाजारों में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एक्जिम बैंक (EXIM Bank) के माध्यम से क्रेडिट लाइन बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष:
केंद्रीय बजट 2026 अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों से निपटने और भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार किया जा रहा है। निर्यातकों, MSME और रक्षा क्षेत्र को मदद देने के साथ-साथ डिजिटल और तकनीकी निवेश पर जोर दिया जाएगा। यह बजट भारत को वैश्विक व्यापार युद्ध और अमेरिकी टैरिफ से सुरक्षित रखने के लिए एक निर्णायक कदम साबित होगा।
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