आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में तिरुमाला (Tirumala) के प्रसाद घी और लड्डू विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलचलों को जन्म दे दिया है। वित्त मंत्री पय्यावुला केशव (Pyyavula Keshav) ने आरोप लगाया है कि 2019 के बाद लड्डू में मिलावट शुरू हुई और इसके प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व वाईएसआर कांग्रेस (YSR Congress) सरकार ने निविदा की शर्तों में बदलाव करके इस घोटाले को बढ़ावा दिया।
2019 के बाद शुरू हुई मिलावट:
वित्त मंत्री केशव ने स्पष्ट किया कि घी में मिलावट की शुरुआत 2019 में हुई, जब वाईएसआरसीपी सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किया। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया भगवान वेंकटेश्वर स्वामी (Lord Venkateswara Swamy) के प्रति विश्वास की अनदेखी करते हुए एक व्यावसायिक लेन-देन की तरह की गई। मंत्री ने कहा कि पहले भी 2022 में मैसूरु (Mysuru) स्थित केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) द्वारा किए गए विश्लेषण में घी में मिलावट पाई गई थी।
सीएम नायडू की रिपोर्ट का हवाला:
केशव ने बताया कि केंद्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को भेजे गए घी के सैंपल की रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि घी में पशु वसा होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (N. Chandrababu Naidu) ने इसी रिपोर्ट का हवाला दिया था।
जगन सरकार ने रिपोर्ट दबाई:
मंत्री केशव ने आरोप लगाया कि घी के सैंपल सीएफटीआरआई, मैसूरु को भी भेजे गए थे और वहां की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि घी मिलावटी है। बावजूद इसके, तत्कालीन वाईएस जगन मोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) सरकार ने इस रिपोर्ट को दबा दिया। केशव ने यह भी कहा कि टीटीडी बोर्ड द्वारा टेंडर की शर्तों में बदलाव से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को ठेका मिलने का रास्ता खुल गया।
SIT की चार्जशीट में करोड़ों का घोटाला:
वित्त मंत्री ने बताया कि विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट में इस घी मिलावट को लेकर करीब 240 करोड़ रुपये का घोटाला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, केशव ने आरोप लगाया कि तत्कालीन टीटीडी चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी (Y.V. Subba Reddy) के निजी सहायक ने डेयरी कंपनियों से चार करोड़ रुपये प्राप्त किए, जिन्हें बाद में दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया।
छोटे और नए व्यवसायों को फायदा:
केशव ने कहा कि टेंडर की शर्तों में बदलाव से अब बड़ी कंपनियों की बजाय छोटे और नए डेयरी व्यवसायों को ठेका मिलने का लाभ हुआ। हालांकि, यह बदलाव घी और लड्डू की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है और श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंचा रहा है।
धार्मिक भावनाओं की अनदेखी:
मंत्री केशव ने जोर देकर कहा कि इस पूरे मामले में धार्मिक भावनाओं की अनदेखी की गई। टेंडर प्रक्रिया और निविदा की शर्तों में बदलाव को केवल व्यावसायिक दृष्टि से देखा गया, जिससे भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के प्रति श्रद्धा प्रभावित हुई।
राजनीतिक हलचल और सार्वजनिक प्रतिक्रिया:
इस खुलासे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने मामले की जांच की मांग की है और जनता में भी चिंता बढ़ी है कि धार्मिक स्थलों के प्रसाद में मिलावट हो रही है। तिरुमाला ट्रस्ट और आंध्र प्रदेश प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इस तरह की लापरवाही क्यों हुई और इसे अब तक क्यों दबाया गया।
आगे की कार्रवाई की संभावना:
सूत्रों के मुताबिक, SIT और राज्य सरकार अब इस मामले की गंभीर जांच करने की तैयारी कर रहे हैं। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दौर जल्द शुरू हो सकता है। मंत्री पय्यावुला केशव ने कहा कि इस मुद्दे पर जनता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बहाल करना प्राथमिकता होगी।
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