यूपी में 15% Gen-Z, 3% से बनती-बिगड़ती है सरकार:कम वोट से जीती सीटों पर मुश्किल आएगी; भाजपा ने बनाई रणनीति
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में विधानसभा चुनाव को अब करीब छह महीने का समय बचा है। ऐसे में राजनीतिक दलों की नजर युवा मतदाताओं, खासकर जेन-जी पर टिक गई है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के कुल मतदाताओं में करीब 15 प्रतिशत जेन-जी हैं। पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि कई सीटों पर जीत-हार का अंतर काफी कम रहा है। ऐसे में जेन-जी के वोटों में मामूली बदलाव भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
इसी वजह से भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP), कांग्रेस (Congress) और चंद्रशेखर की पार्टी समेत तमाम राजनीतिक दल युवाओं को अपने पाले में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कोई सीधे संवाद पर जोर दे रहा है तो कोई सामाजिक माध्यमों के जरिए युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश में जुटा है।
2012 में सिर्फ 3.24 प्रतिशत वोट का बड़ा असर:
2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सीधा मुकाबला था। समाजवादी पार्टी को 29.15 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बहुजन समाज पार्टी को 25.91 प्रतिशत वोट मिले। दोनों पार्टियों के वोट शेयर में अंतर केवल 3.24 प्रतिशत था।
इसके बावजूद सीटों के मामले में बड़ा अंतर देखने को मिला। समाजवादी पार्टी ने 224 सीटें जीतीं, जबकि बहुजन समाज पार्टी को सिर्फ 80 सीटों पर जीत मिली। यानी महज 3.24 प्रतिशत अधिक वोट शेयर के साथ समाजवादी पार्टी ने 144 सीटें ज्यादा हासिल कीं। इसी चुनाव में भाजपा को 15 प्रतिशत वोट मिले थे और उसे 47 सीटें मिली थीं।
2022 में 7.22 प्रतिशत वोट का बड़ा अंतर:
2022 के विधानसभा चुनाव में भी वोट शेयर और सीटों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। भाजपा और उसके सहयोगी दलों को कुल 43.82 प्रतिशत वोट मिले और गठबंधन ने 273 सीटें हासिल कीं।
वहीं समाजवादी पार्टी गठबंधन को 36.60 प्रतिशत वोट मिले और उसे 125 सीटें मिलीं। दोनों गठबंधनों के वोट शेयर में 7.22 प्रतिशत का अंतर था, लेकिन सीटों का अंतर 148 रहा। यही आंकड़े बताते हैं कि मत प्रतिशत में छोटा बदलाव भी विधानसभा के नतीजों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
99 सीटों पर कम अंतर से हुआ था फैसला:
2022 के विधानसभा चुनाव में 99 सीटों पर हार-जीत का अंतर एक हजार से 10 हजार वोटों के बीच रहा था। इनमें भाजपा ने 55 सीटें और समाजवादी पार्टी ने 35 सीटें जीती थीं। राष्ट्रीय लोक दल को तीन, निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को दो-दो सीटें मिली थीं। कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने भी एक-एक सीट पर जीत दर्ज की थी।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 13 करोड़ मतदाता हैं। इनमें लगभग 2.07 करोड़ यानी 15 प्रतिशत जेन-जी मतदाता बताए गए हैं। यदि इस वर्ग का बड़ा हिस्सा किसी एक राजनीतिक दल या गठबंधन की ओर जाता है, तो 80 से 120 विधानसभा सीटों के नतीजों पर असर पड़ने की संभावना बताई जा रही है।
भाजपा के सामने युवाओं को जोड़ने की चुनौती:
चुनाव संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के पदाधिकारी संजय सिंह के मुताबिक, 10 हजार से कम मतों के अंतर से जीती गई 99 सीटों पर आगामी चुनाव में जेन-जी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संजय सिंह के अनुसार उनके शोध में सामने आया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में 85 प्रतिशत युवाओं ने भाजपा को वोट दिया था। 2019 में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत रहा, जबकि 2024 में 50 से 55 प्रतिशत युवाओं ने भाजपा का समर्थन किया। उनके मुताबिक तीन चुनावों में युवा मतदाताओं के समर्थन में 30 से 35 प्रतिशत की गिरावट आई।
परिवार की पसंद से अलग फैसला ले रहा युवा:
लखनऊ (Lucknow) के शिक्षाविद् पंकज अग्रवाल का कहना है कि जेन-जी का कोई स्थापित नेता या राजनीतिक दल नहीं है। उनके मुताबिक सामाजिक माध्यमों के रुझान युवाओं की सोच और मुद्दों को प्रभावित करते हैं।
उनका कहना है कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों के विरोध जैसे मुद्दों पर बड़ी संख्या में युवाओं का सड़कों पर उतरना बताता है कि वे अपने भविष्य से जुड़े सवालों पर किसी राजनीतिक दल के झंडे के मोहताज नहीं हैं।
भाजपा की युवाओं से सीधे संवाद की तैयारी:
भाजपा की ओर से जेन-जी तक पहुंच बनाने के लिए सीधे संवाद की योजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अलग-अलग विश्वविद्यालयों के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े छात्रों के साथ संवाद कर सकते हैं। इस बातचीत में छात्रों को मुख्यमंत्री से सीधे सवाल पूछने का मौका देने की योजना बताई गई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उत्तर प्रदेश को पश्चिम और पूर्व, दो क्षेत्रों में बांटकर जेन-जी से संवाद की योजना बनाई है। क्षेत्र प्रचारक अलग-अलग विश्वविद्यालयों में जाकर युवाओं की भावनाओं और समस्याओं को समझेंगे। बातचीत से सामने आने वाले मुद्दों की जानकारी सरकार और भाजपा संगठन तक पहुंचाई जाएगी।
भाजपा बनाएगी युवा सलाहकार समिति:
भाजपा की ओर से युवाओं की सरकार तक सीधी पहुंच बनाने के लिए युवा सलाहकार समिति बनाने की योजना है। इसमें युवा प्रतिनिधि, छात्र नेता, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी, युवा उद्यमी और सामाजिक माध्यमों से जुड़े प्रभावशाली लोगों को शामिल किया जाएगा।
शुरुआत में समिति जिला स्तर पर बनाने की योजना है। इसके बाद इसे ब्लॉक स्तर तक विस्तार देने की बात है। इसका उद्देश्य युवाओं के जमीनी मुद्दों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार तक पहुंचाना है।
इसके अलावा भाजपा अपने नेताओं और जनप्रतिनिधियों को छोटे वीडियो, सामाजिक माध्यमों के रुझानों और एक्स के जरिए युवाओं से संवाद करने की डिजिटल ट्रेनिंग भी दे रही है।
सपा की नजर डिजिटल माध्यमों और युवा चेहरों पर:
समाजवादी पार्टी भी युवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों पर जोर दे रही है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने प्रदेशभर के 200 से ज्यादा डिजिटल सामग्री निर्माताओं और प्रभावशाली लोगों के साथ संवाद किया था।
पार्टी की कोशिश पारंपरिक माध्यमों पर निर्भरता कम करके यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए युवाओं तक अपनी नीतियां पहुंचाने की है। पेपर लीक, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर युवाओं के लिए तथ्य आधारित सामग्री उपलब्ध कराने और स्थानीय भाषा-बोलियों के जरिए ग्रामीण तथा कस्बाई युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति बताई गई है।
समाजवादी पार्टी के युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज और प्रिया सरोज के भाषणों तथा युवा मुद्दों से जुड़े बयानों की छोटी वीडियो सामग्री भी युवाओं तक पहुंचाई जा रही है। इनके संघर्ष और राजनीतिक सफर से जुड़ी छोटी वृत्तचित्र सामग्री के जरिए पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से जुड़ने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस भी बढ़ाएगी युवाओं से सीधा संपर्क:
कांग्रेस भी जेन-जी को जोड़ने के लिए सीधे संवाद की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने 8 अगस्त को प्रयागराज (Prayagraj) में छात्रों से संवाद किया था। कांग्रेस प्रवक्ता सीपी राय के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए 1.74 लाख छात्रों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया था।
कांग्रेस की ओर से आगे उत्तर प्रदेश के दो से तीन जिलों में भी इसी तरह के संवाद कार्यक्रम करने की बात कही गई है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी अलग-अलग जिलों में युवाओं से बातचीत करेंगे।
इसके साथ ही नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और यूथ कांग्रेस को कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अधिक से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए काम करने को कहा गया है।
युवाओं के मुद्दों पर टिकी चुनावी रणनीति:
आगामी विधानसभा चुनाव में जेन-जी मतदाताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। रोजगार, परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े मुद्दे युवाओं की प्राथमिकताओं में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक दल भी इन्हीं मुद्दों पर युवाओं से संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
दिए गए विश्लेषण के अनुसार जेन-जी पारंपरिक रैलियों और भाषणों की तुलना में सामाजिक माध्यमों और अपने वास्तविक मुद्दों से अधिक प्रभावित हो सकता है। ऐसे में युवाओं के मुद्दों पर कौन सा दल प्रभावी रणनीति तैयार करता है और उन्हें अपने साथ जोड़ पाता है, यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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