उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अंडों पर एक्सपायरी डेट लिखने का नियम फिलहाल लागू नहीं किया जा सकेगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग (FSDA) ने इस मामले में अपनी असमर्थता जताई है। विभाग का कहना है कि यदि इस नियम को सख्ती से लागू किया गया, तो राज्य में अंडों की भारी कमी हो सकती है और कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस मुद्दे पर जहां एक ओर विभाग व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यूपी कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह (VP Singh) ने विभाग पर बड़े व्यापारियों के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।
आपूर्ति व्यवस्था बनी बड़ी चुनौती:
प्रदेश में अंडों की खपत काफी अधिक है। हर दिन लगभग 3.35 करोड़ अंडों की खपत होती है, जबकि स्थानीय उत्पादन करीब 1.80 करोड़ अंडों का ही है। बाकी की जरूरत हरियाणा (Haryana), पंजाब (Punjab), तेलंगाना (Telangana), आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) और तमिलनाडु (Tamil Nadu) से पूरी होती है। इन राज्यों से रोजाना करीब 1.55 करोड़ अंडों की सप्लाई होती है, जो कुल खपत का बड़ा हिस्सा है। ऐसे में यदि अंडों पर प्रोडक्शन और एक्सपायरी डेट की स्टैंपिंग अनिवार्य कर दी जाती है, तो बाहर से आने वाले अंडों की बिक्री प्रभावित हो सकती है, जिससे सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा।
स्टैंपिंग नियम से पैदा हो रहा भ्रम:
अंडों के संरक्षण और उपयोग को लेकर तापमान की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कम तापमान पर अंडे लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जबकि सामान्य तापमान पर उनकी अवधि कम हो जाती है। ऐसे में यदि हर अंडे पर प्रोडक्शन और एक्सपायरी डेट अंकित करना अनिवार्य किया जाता है, तो यह तय करना मुश्किल हो जाएगा कि कौन-से अंडे सीधे बाजार में बेचे जाएंगे और कौन-से कोल्ड स्टोरेज में रखे जाएंगे। इसी कारण विभाग इस नियम को लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है।
दूसरे राज्यों से तालमेल की जरूरत:
एफएसडीए (FSDA) के अधिकारियों के अनुसार, जिन राज्यों से अंडों की आपूर्ति होती है, वहां इस तरह के नियम केवल निर्यात किए जाने वाले अंडों पर ही लागू होते हैं। ऐसे में राज्य सरकार पहले इन राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहती है। इसके लिए हरियाणा (Haryana), पंजाब (Punjab), तेलंगाना (Telangana), आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) और तमिलनाडु (Tamil Nadu) को पत्र भेजकर उनकी व्यवस्थाओं और नियमों की जानकारी ली जाएगी, ताकि एक समान व्यवस्था विकसित की जा सके।
व्यापारियों पर दबाव के आरोप:
यूपी कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह (VP Singh) ने आरोप लगाया है कि विभाग बड़े व्यापारियों के दबाव में इस नियम को लागू नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि अंडों के उत्पादन और आपूर्ति के पुराने आंकड़ों का हवाला देकर नियम को टालने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविक स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अंडों की पहचान के लिए अलग-अलग रंग की स्याही से स्टैंपिंग की जा सकती है, जिससे बाजार और स्टोरेज के अंडों में अंतर किया जा सके।
कीमतों और बाजार पर असर की आशंका:
अंडों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बड़े व्यापारी अंडों का भंडारण कर कीमतों को नियंत्रित करते हैं। हाल के दिनों में अंडों के दाम में तेजी देखी गई है, जिससे बाजार पर असर पड़ा है। इस स्थिति में यदि स्टैंपिंग का नियम लागू होता है, तो छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
एफएसडीए का पक्ष और आगे की रणनीति:
एफएसडीए (FSDA) की कमिश्नर रौशन जैकब (Roshan Jacob) का कहना है कि यह मामला जटिल है और इसे लागू करने से पहले कई पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। इसमें मांग और आपूर्ति के संतुलन, छोटे उत्पादकों के हित और नियमों के व्यावहारिक क्रियान्वयन जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित विभागों से चर्चा के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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