योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कक्षा-कक्षीय शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा (Parth Sarathi Sen Sharma) ने टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 (TLPS Report-2025) का विमोचन किया। साथ ही ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस’ (Policy to Practice) संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों से सीधे संवाद कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा में वास्तविक बदलाव केवल नीतियां बनाने से नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षक द्वारा कक्षा-कक्ष में अपनाई जाने वाली प्रभावी शिक्षण पद्धति से संभव होगा।
शिक्षकों की भूमिका पर दिया विशेष जोर:
पार्थ सारथी सेन शर्मा (Parth Sarathi Sen Sharma) ने कहा कि किसी भी शिक्षण प्रक्रिया की सफलता का सबसे बड़ा आधार बच्चों का पढ़ाई से जुड़ाव है। शिक्षकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नवाचार अपनाते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा सुधार का उद्देश्य केवल विद्यालयों की व्यवस्था बेहतर करना नहीं, बल्कि प्रत्येक छात्र के सीखने के स्तर में सकारात्मक बदलाव लाना है।
स्कूल चलो अभियान पर दिए निर्देश:
उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान (School Chalo Abhiyan) के तहत तीन वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा बाल वाटिका से बाहर नहीं रहना चाहिए। वहीं छह वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित न रहे, इसके लिए सभी शिक्षकों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 में विद्यार्थियों के नामांकन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित शिक्षकों को निभानी होगी।
नियमित उपस्थिति और कैच-अप लर्निंग पर फोकस:
बैठक में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार बताया गया। निर्देश दिए गए कि यदि कोई छात्र लगातार विद्यालय नहीं आ रहा है तो उसके अभिभावकों से संपर्क कर उसे दोबारा स्कूल से जोड़ा जाए। इसके साथ ही सत्र की शुरुआत से ही कैच-अप लर्निंग (Catch-up Learning) को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए, ताकि जिन बच्चों की पढ़ाई में अंतर रह गया है, उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता मिल सके।
निपुण लक्ष्य और लेखन कौशल पर जोर:
कार्यक्रम में बताया गया कि निपुण उत्तर प्रदेश (NIPUN Uttar Pradesh) का दायरा अब कक्षा 1 और 2 से बढ़ाकर कक्षा 3 से 5 तक किया जा रहा है। शिक्षकों को निपुण लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने, परिणामों का विश्लेषण करने तथा उन्हें अभिभावकों के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण ‘परख’ के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि विद्यार्थियों के लेखन कौशल में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। इसके लिए प्रतिदिन स्वतंत्र पठन और स्वतंत्र लेखन की गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, ताकि बच्चों की रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच विकसित हो सके।
अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन की भागीदारी जरूरी:
बैठक में होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (Holistic Progress Card) के प्रभावी उपयोग पर भी बल दिया गया। शिक्षकों से कहा गया कि वे विद्यार्थियों की प्रगति की जानकारी नियमित रूप से अभिभावकों के साथ साझा करें। इसके अलावा विद्यालय प्रबंधन समिति की सक्रिय भागीदारी को शिक्षा सुधार का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। शिक्षक संकुल बैठकों को अनुभव साझा करने का मंच बनाने और 15 जून को जारी विभागीय पत्र में उल्लिखित दस प्रमुख शिक्षण बिंदुओं पर प्रत्येक बैठक में विस्तार से चर्चा करने के निर्देश भी दिए गए।
विशेषज्ञों और पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने साझा किए अनुभव:
कार्यक्रम के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में कक्षा-कक्षीय शिक्षण को मजबूत बनाने, प्रभावी शिक्षण अभ्यासों, सहायक पर्यवेक्षण, निपुण सूची एवं तालिका के उपयोग तथा मध्य स्तरीय शैक्षणिक नेतृत्व की भूमिका पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। वहीं राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने विद्यालयों में किए गए नवाचार, पठन अभियान और निपुण कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।
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