रिपोर्टर: अनुज कुमार
लखनऊ (Lucknow)। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस (Congress) ने युवाओं की बेरोजगारी, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (Industrial Training Institutes – ITI) में लापरवाही और किसानों के हितों से जुड़ी समस्याओं को लेकर योगी सरकार (Yogi Government) पर जमकर सवाल उठाए। नेता विधानमंडल दल कांग्रेस (Leader of Legislative Party, Congress) आराधना मिश्रा मोना (Aradhana Mishra Mona) ने सदन में कहा कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के पर्याप्त अवसर नहीं दिए जा रहे हैं।

युवाओं के कौशल विकास और रोजगार पर गंभीर चिंता:
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में योगी सरकार ने सिर्फ 37 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (Government ITI) स्वीकृत किए, जिनमें से 32 के भवन बने, लेकिन प्रशिक्षण अब तक शुरू नहीं हो पाया। इससे युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को सौंपे गए प्रशिक्षण संस्थानों में फीस की मनमानी बढ़ गई है और सरकार द्वारा उस पर कोई नियंत्रण नहीं रखा जा रहा।
प्राइवेट ITI प्रशिक्षण संस्थानों की फीस पर चिंता:
आराधना ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को प्राइवेट ITI संस्थानों में महंगी फीस का बोझ उठाना पड़ रहा है। पहले सरकारी ITI में प्रशिक्षण शुल्क 700 से 1000 रुपये था और छात्र स्टाइपेंड (Stipend) भी पाते थे। अब प्राइवेट एजेंसियों द्वारा संचालित संस्थानों में 70 प्रतिशत सीटें प्राइवेट कोटे से भरी जा रही हैं, जिससे गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
किसानों के हितों का मुद्दा:
कांग्रेस नेता ने कहा कि कृषि के लिए आवंटित पिछले बजट 2025 और 2026-27 का केवल 45 प्रतिशत ही खर्च हो सका। उन्होंने मांग की कि सरकार MSP (Minimum Support Price) पर खरीदी सुनिश्चित करे, छुट्टा जानवरों की समस्या का समाधान लाए और कृषि दुर्घटना बीमा (Crop Accident Insurance) की धनराशि पांच लाख रुपये से बढ़ाई जाए। आराधना मिश्रा मोना ने यह भी कहा कि यूरिया और डीएपी की बोरी का वजन घटा दिया गया और दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिससे किसानों पर दबाव बढ़ा है।
आईटीआई संस्थानों में स्टाफ और संचालन की समस्या:
आराधना ने कहा कि एक ITI में 30 से अधिक प्रशिक्षक, एक प्रधानाचार्य, तीन कार्यदेशक, सात प्रशासनिक अधिकारी और नौ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने चाहिए। इन पदों पर भर्ती नहीं हुई है, जिससे संस्थान सही ढंग से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने सभी ITI संस्थानों को शीघ्र चालू करने, स्टाफ भर्ती करने और संचालन एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
प्रदेश में युवाओं के लिए अवसर कम, निजीकरण बढ़ा:
आराधना ने कहा कि भाजपा सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी ITI का निजीकरण करके युवाओं को धोखा दे रही है। इससे रोजगार की दिशा में रुचि रखने वाले युवा निजी कंपनियों के अधीन महंगी फीस देकर प्रशिक्षण लेने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह युवाओं के रोजगार की चिंता नहीं कर रही और सिर्फ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।
Conclusion:
कांग्रेस के बजट सत्र में उठाए गए ये मुद्दे युवाओं और किसानों की परेशानियों को उजागर करते हैं। आराधना मिश्रा मोना ने सरकार से स्पष्ट योजना, स्टाफ भर्ती, प्रशिक्षण संस्थानों का संचालन और फीस नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना इस पर ध्यान दिए प्रदेश की प्रगति संभव नहीं है।
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