असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा अब केवल पांच विषयों के लिए, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (Uttar Pradesh Education Service Selection Commission) द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि पूरी लिखित परीक्षा को रद्द करना उचित नहीं था, क्योंकि पेपर लीक की पुष्टि केवल कुछ ही विषयों तक सीमित पाई गई थी। कोर्ट ने यह भी माना कि शेष विषयों के उम्मीदवारों को अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि और परीक्षा प्रक्रिया:
असिस्टेंट प्रोफेसर के 33 विषयों में कुल 910 पदों पर चयन के लिए लिखित परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आने पर जांच शुरू हुई। जांच में आयोग के संविदा कर्मचारी महबूब अली (Mahboob Ali) और 18 चयनित अभ्यर्थियों की संलिप्तता का खुलासा हुआ। इसके बाद राज्य सरकार और आयोग ने सभी विषयों के लिए पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया था।

हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणी और निर्णय:
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि पेपर लीक के प्रमाण केवल पांच विषयों तक सीमित हैं। इनमें उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान शामिल हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शेष 28 विषयों में किसी प्रकार की अनियमितता या प्रभाव का कोई ठोस सबूत एक वर्ष बीतने के बाद भी सामने नहीं आया है।

बेदाग विषयों के उम्मीदवारों को राहत:
कोर्ट ने कहा कि जिन 28 विषयों पर कोई दाग नहीं लगा है, उनके उम्मीदवारों को पुनर्परीक्षा के मूल्यांकन में शामिल नहीं किया जाएगा। इनमें अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, कानून, इतिहास, भौतिकी सहित कई विषय शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इन विषयों की ओएमआर शीट का मूल्यांकन 18 अप्रैल 2026 को होने वाली पुनर्परीक्षा के आधार पर नहीं किया जाएगा।

दागदार विषयों के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया:
न्यायालय ने आदेश दिया कि केवल पांच प्रभावित विषयों के उम्मीदवारों की ओएमआर शीट का ही मूल्यांकन किया जाएगा। इन विषयों में उर्दू (Urdu), हिंदी (Hindi), भूगोल (Geography), समाजशास्त्र (Sociology) और जंतु विज्ञान (Zoology) शामिल हैं। इन विषयों के लिए ही पुनर्परीक्षा के परिणामों को अंतिम चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

अंतिम चयन प्रक्रिया पर निर्देश:
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अंतिम साक्षात्कार चरण के लिए आयोग को दोनों प्रक्रियाओं का समन्वय करना होगा। इसमें 28 बेदाग विषयों के अप्रैल 2025 की मूल परीक्षा के आधार पर शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को शामिल किया जाएगा। वहीं, पांच प्रभावित विषयों के लिए नई पुनर्परीक्षा से चयनित अभ्यर्थियों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि अंतिम चयन प्रक्रिया संतुलित और निष्पक्ष रह सके।

न्यायालय का संतुलित दृष्टिकोण:
अदालत ने कहा कि दागदार और बेदाग उम्मीदवारों को अलग-अलग करके देखा जाना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। साथ ही, अंतिम समय की असुविधा को देखते हुए 18 अप्रैल 2026 को निर्धारित पुनर्परीक्षा को जारी रखने की अनुमति दी गई है। विशेष अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि केवल प्रभावित विषयों तक ही कार्रवाई सीमित रहे।

इस निर्णय को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

#,up,assistant,professor,exam,allahabad,high,court,decision,

Disclaimer
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading